कभी टूट गई थीं सिकंदरा की मीनारें,जानिए पूरा मामला
आगरा,VON NEWS: दिल्ली-आगरा हाईवे पर स्थित मुगल शहंशाह अकबर के मकबरे का बाहर से नजर आने वाला भव्य द्वार राहगीरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। उसकी गगनचुंबी मीनारें दूर से ही नजर आती हैं। करीब 115 वर्ष पूर्व यह द्वार ऐसा नहीं था। इसकी मीनारें टूटी हुई थीं। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल को काले धुएं से बचाने को लैंप भेंट करने वाले लार्ड कर्जन ने यहां दिन-रात संरक्षण कार्य कराकर मीनारों की मरम्मत कराई थी।
मुगल शहंशाह अकबर ने अपने जीवनकाल में ही अपने मकबरे का निर्माण शुरू करा दिया था। वर्ष 1605 में उसकी मौत के बाद उसके बेटे जहांगीर ने अकबर के मकबरे को पूरा कराया। वर्ष 1613 में बनकर तैयार हुए इस मकबरे पर उस समय करीब 15 लाख रुपये की लागत आई थी। अकबर के मकबरे को जाट राजा राम ने औरंगजेब के समय हमला कर लूट लिया था। कुछ इतिहासकारों ने तो उसके द्वारा अकबर की कब्र खोदकर उसकी अस्थियां जलाने की बात भी लिखी है। वर्ष 1764 में आगरा में जाटों का शासन होने के बाद इस मकबरे को काफी क्षति पहुंची थी।
मकबरे के भव्य प्रवेश द्वार के ऊपर बनीं मीनारें टूट गई थीं। करीब 150 वर्षों तक यह मीनारें टूटी ही रहीं। वर्ष 1834 की एक ब्रिटिशकालीन पेंटिंग में चार में से दो मीनारों को टूटा हुआ दिखाया गया है। केसी मजूमदार ने अपनी किताब ‘इंपीरियल आगरा आफ द मुगल्स’ में मीनारों के संरक्षण का जिक्र किया है। कर्जन ने वर्ष 1905 में वेल्स के प्रिंस और प्रिंसेज के आगरा दौरे से पूर्व दिन-रात संरक्षण कार्य कराकर इन मीनारों को दोबारा बनवाया था। मजूमदार ने इस काम को लार्ड कर्जन का भारत में अंतिम काम बताया है।
रेड सैंड स्टोन से बना सिकंदरा का प्रवेश द्वार करीब 74 फुट ऊंचा है। इसके ऊपर चारों कोनों पर बनीं तीन मंजिला मीनारों की ऊंचाई छत से 86 फुट है। यह सफेद संगमरमर की बनी हुई हैं। मीनारों के अंदर सीढ़ियां बनी हैं, जो कि उसके शीर्ष तक जाती हैं।