कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच कैसे होगा वेंटिलेटर का इंतजाम
नई दिल्ली,VON NEWS: कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। संक्रमित लोगों की जान बचाने के लिए बुनियादी जरूरतों के अभाव ने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी है। इनमें वेंटिलेटर सबसे अहम माना जा रहा है। लेकिन इसकी कमी चिंता का सबब बन रही है। सरकार और निजी क्षेत्रों ने अपनी ओर से वेंटिलेटरों की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। फिलहाल, देश में क्या है वेंटिलेटर की स्थिति, डालते हैं एक नजर।
इस तरह जानिए वेंटिलेटर : वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है, जो खुद से सांस लेने में असमर्थ लोगों को कृत्रिम रूप से सांस देने में सहायक है। इसमें कंप्रेस्ड ऑक्सीजन का अन्य गैसों के साथ इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा 21 फीसद ही होती है। इसके जरिए रोगियों को जरूरी मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है, जो फेफड़े को सांस छोड़ने में मदद करती है।.jpg)
कोविड-19 मरीजों के लिए जरूरी : विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड-19 पीड़ित रोगियों में कभी-कभी इंटरस्टीशियल निमोनिया होता है। इसका वायरस फेफड़ों के भीतर वायु नलिकाओं में सूजन पैदा करता है, जिसे ब्रॉकियोल्स कहते हैं। इस क्षेत्र में सूजन का मतलब है कि हवा अंदर-बाहर नहीं हो सकती है। चूंकि फेफड़ों में वायु विनिमय का क्षेत्र छोटा पड़ जाता है, इसलिए रोगियों को सांस लेने में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जो ज्यादा समय तक करना संभव नहीं होता है। जब रोगी प्रति मिनट 40-45 की दर से सांस नहीं ले पाता है तो उसे वेंटिलेटर की जरूरत होती है, जो उसके फेफड़े को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाता है। इसके सहारे रोगी को ठीक होने का समय मिल जाता है, जिससे वह फिर से सांस लेने की स्थिति में आ सकता है।

जरूरत से बहुत कम वेंटिलेटर : देश के सरकारी अस्पताल 14,220 आइसीयू वेंटिलेटर युक्त हैं। इसके अतिरिक्त कोविड-19 के रोगियों के लिए बनाए गए विशेष अस्पतालों में करीब 6,000 वेंटिलेटर हैं। जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के हालात बिगड़ने की स्थिति में 15 मई तक देश में एक लाख से लेकर 2.2 लाख वेंटिलेटर की जरूरत हो सकती है। हालांकि दिल्ली के अपोलो अस्पताल के रेस्परेटरी मेडिसिन के सीनियर कंसलटेंट डॉ. राजेश चावला मानते हैं कि अभी वेंटिलेटर की कमी नहीं है, क्योंकि कोरोना के कुछ ही रोगियों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। अधिकांश तो ऑक्सीजन पर ही होते हैं। लेकिन हालात यदि इटली जैसे हो जाएं, तब तो किसी भी देश को समस्या हो सकती है। इटली में गुरुवार तक 110574 लोग संक्रमित हुए और 13155 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन भारत की स्थिति फिलहाल ठीकठाक दिखती है।
डिजाइन सरल होने से आयातित कंपोनेंट की बाधा से भी पार पाया जा सकता है। इसके साथ ही मारुति सुजुकी इंडिया ने भी नोएडा की एक कंपनी एजीवीए हेल्थकेयर के साथ मिलकर द्रुतगति से उत्पादन बढ़ाकर 10 हजार प्रतिमाह करने की घोषणा की है। इसके दीगर, सेंसर तथा डिस्प्ले जैसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट के आयात के विकल्प खोजने के भी प्रयोग हो रहे हैं।
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