सरकार को भ्रष्ट बताने वाले अतुल कृष्ण भटनागर से सम्मान लेते दिखे उत्तराखंड के मंत्री; CBI केस, मेडिकल कॉलेज विवाद और सरकारी जांचों के बीच तस्वीरों ने खड़े किए बड़े सवाल

उत्तराखंड की राजनीति में सुभारती को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

VOICE OF NATION EXCLUSIVE

₹87.63 करोड़ की वसूली बाकी, फिर सुभारती के दरवाजे क्यों पहुंचे मंत्री सुबोध उनियाल?

सरकार को भ्रष्ट बताने वाले अतुल कृष्ण भटनागर से सम्मान लेते दिखे उत्तराखंड के मंत्री; CBI केस, मेडिकल कॉलेज विवाद और सरकारी जांचों के बीच तस्वीरों ने खड़े किए बड़े सवाल

देहरादून | Voice of Nation Special Report

उत्तराखंड की राजनीति में सुभारती को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

एक तरफ उत्तराखंड सरकार द्वारा सुभारती से जुड़े ट्रस्ट/मेडिकल कॉलेज से ₹87.63 करोड़ की सरकारी धनराशि की वसूली का मामला वर्षों पुराना है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सुभारती के कार्यक्रम में पहुंचकर उसके संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण भटनागर और यशवर्धन रस्तोगी के साथ मंच साझा करते और सम्मान ग्रहण करते दिखाई दिए।

अब सवाल यह है—

आखिर मंत्री सुबोध उनियाल की ऐसी क्या मजबूरी थी कि सरकार की करोड़ों रुपये की वसूली और इतने विवादों के बावजूद उन्हें सुभारती के मंच तक जाना पड़ा?

यह सवाल केवल राजनीतिक नहीं है। इसके पीछे अदालतों, मेडिकल रेगुलेटर और सरकार के अपने रिकॉर्ड से जुड़ा लंबा इतिहास है।

₹87.63 करोड़—यह कोई राजनीतिक आरोप नहीं, DM देहरादून से जारी वारंट की रकम है

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चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने 4 जुलाई 2019 को ₹97.13 करोड़ की वसूली का आदेश दिया था।

इसमें से ₹9.5 करोड़ बैंक गारंटी के माध्यम से प्राप्त हो चुके थे और उसे समायोजित करने के बाद ₹87.63 करोड़ की शेष राशि का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया था।

रिकॉर्ड में यह भी दर्ज हुआ कि सुभारती मेडिकल कॉलेज के 300 विद्यार्थियों को तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने के कारण राज्य पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा।

यानी यह ₹87.63 करोड़ का आंकड़ा किसी राजनीतिक भाषण या मीडिया अनुमान से नहीं निकला है।

यह उत्तराखंड सरकार की अपनी रिकवरी कार्रवाई है

फिर सवाल—वसूली कहां तक पहुंची?

साल बीत गए।

उत्तराखंड सरकार को प्रदेश की जनता को बताना चाहिए कि—

₹87.63 करोड़ में से अब तक वास्तव में कितने रुपये सरकारी खजाने में आए?

यदि पूरी रकम नहीं आई तो आज कितना बकाया है?

वसूली में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है?

और जब सरकार स्वयं इतनी बड़ी रकम की वसूली कर रही हो तो उसी समूह के कार्यक्रम में राज्य के कैबिनेट मंत्री का जाकर सम्मान ग्रहण करना क्या संदेश देता है?

सुभारती की जमीन पर MCI ने बहुत पहले उठाए थे सवाल

यह विवाद भी नया नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के 30 अगस्त 2017  के फैसले में दर्ज है कि सुभारती द्वारा देहरादून में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के आवेदन पर MCI ने पाया था कि जिस जमीन पर कॉलेज प्रस्तावित था, वह Dr. Jagat Narain Subharti Charitable Trust के नाम दर्ज नहीं थी। और 2019 मे छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किया गया जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ा

जमीन के title और ownership को लेकर मुकदमे लंबित होने का भी उल्लेख किया गया।

इसी आधार पर MCI की Executive Committee ने कहा था कि ट्रस्ट भूमि से संबंधित qualifying criteria पूरा नहीं करता और उसने केंद्र सरकार को नकारात्मक recommendation भेजी थी।

बाद में मामला विभिन्न नियामकीय और न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजरा।

सरकारी जांचें भी उठाती रहीं सवाल

सुभारती से जुड़े देहरादून के संस्थानों को लेकर जमीन, ट्रस्ट के अधिकार, मेडिकल एवं नर्सिंग संस्थानों के संचालन और नियामकीय अनुमतियों पर समय-समय पर शिकायतें और सरकारी जांचें हुई हैं।

Voice of Nation के पास उपलब्ध सरकारी जांच दस्तावेजों के अनुसार, देहरादून प्रशासन की जांच और बाद में राज्य स्तर की उच्च स्तरीय जांच में भी संबंधित ट्रस्ट के नाम भूमि होने के प्रश्न पर गंभीर निष्कर्ष/आपत्तियां सामने आईं।

इन रिपोर्टों पर संबंधित संस्थाओं को अपना पक्ष रखने और न्यायिक चुनौती देने का पूरा अधिकार है।

लेकिन सरकार से सवाल है—

जब आपकी अपनी कमेटियां जांच कर रही हैं, सरकारी पैसा वसूल किया जाना है और मामले अदालतों/रेगुलेटरी संस्थाओं तक पहुंचे हैं, तब सरकार के मंत्री को उसी संस्था के मंच पर सम्मान ग्रहण करने की क्या आवश्यकता थी?

और अब अतुल कृष्ण भटनागर का वीडियो—“आज आपके देश में सबसे भ्रष्ट सरकार है…”

इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है Voice of Nation को उपलब्ध अतुल कृष्ण भटनागर का वीडियो।

वीडियो क्लिप में अतुल कृष्ण सरकार की कार्यप्रणाली पर हमला करते हुए कहते सुनाई देते हैं—

https://x.com/voiceofnation18/status/2087855543834882304?s=46

“आज आपके देश में सबसे भ्रष्ट सरकार है…”

इसी संदर्भ में वह उत्तराखंड की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आसपास के पुल का उदाहरण देते हैं और कहते हैं कि—

“आपके निकट पुल ही देख लीजिए, बार-बार टूट जाता है।”

यदि उनके पूरे भाषण का संदर्भ भी यही है तो भाजपा के लिए सवाल और बड़ा हो जाता है।

जो व्यक्ति देश और उत्तराखंड की सरकार की व्यवस्था पर भ्रष्टाचार का इतना गंभीर आरोप लगा रहा हो, उसी व्यक्ति के हाथों भाजपा सरकार का कैबिनेट मंत्री सम्मान क्यों ग्रहण कर रहा है?

क्या मंत्री सुबोध उनियाल उस बयान से सहमत हैं?

यदि सहमत नहीं हैं तो क्या उन्होंने उसी मंच से उसका विरोध किया?

और यदि नहीं किया, तो क्यों?

CBI केस का साया भी—

अतुल कृष्ण भटनागर का नाम निर्मल शर्मा हत्याकांड से जुड़े CBI मामले में भी आया है और उनके विरुद्ध CBI की 302,120 B आपराधिक कार्यवाही न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आरोपपत्र CBI ने दाखिल किया है

लेकिन राजनीतिक प्रश्न अलग है।

क्या गंभीर आपराधिक आरोपों के न्यायिक परीक्षण का सामना कर रहे व्यक्ति से सार्वजनिक सम्मान लेते समय किसी राज्य के कैबिनेट मंत्री को अतिरिक्त सावधानी नहीं बरतनी चाहिए?

मेडिकल कॉलेज विवाद का इतिहास भी लंबा

सुभारती मेडिकल कॉलेज के मामले में MCI की आपत्तियां भी रिकॉर्ड पर हैं।

MCI के आधिकारिक दस्तावेज में दर्ज है कि मेडिकल कॉलेज ने भूमि संबंधी qualifying criteria पूरा नहीं किया था और इसी आधार पर उसकी योजना को केंद्र सरकार को वापस भेजते हुए disapproval की recommendation की गई थी।

केंद्र सरकार ने भी जून 2016 में आवेदन अस्वीकार किया था।

यानी सुभारती का मेडिकल कॉलेज विवाद किसी एक शिकायतकर्ता की कहानी नहीं बल्कि MCI, केंद्र सरकार और अदालतों तक पहुंचा हुआ संस्थागत विवाद रहा है।

300 MBBS छात्रों की कीमत आखिर किसने चुकाई?

मेडिकल कॉलेज की परिस्थितियों के कारण 300 विद्यार्थियों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित करने की स्थिति बनी।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार सरकार ने कहा कि इन विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए अतिरिक्त infrastructure, teachers और staff सहित संसाधनों की जरूरत पड़ी और राज्य पर बड़ा वित्तीय भार आया।

इसी वित्तीय नुकसान की गणना से ₹97.13 करोड़ की recovery निर्धारित हुई और ₹9.5 करोड़ समायोजित होने के बाद ₹87.63 करोड़ बाकी रहे।

इसलिए सवाल सिर्फ “सुभारती बनाम सरकार” का नहीं है।

यह उत्तराखंड के करदाताओं के पैसे का सवाल है।

एक तरफ ‘Zero Tolerance’, दूसरी तरफ सम्मान?

भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और पारदर्शिता को अपनी सरकार की प्राथमिकताओं के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।

उत्तराखंड की भाजपा सरकार भी भ्रष्टाचार के खिलाफ “Zero Tolerance” की नीति की बात करती रही है।

ऐसे में यह तस्वीर राजनीतिक रूप से असहज सवाल पैदा करती है

जिस समूह से सरकारी धन की इतनी बड़ी recovery जुड़ी हो,

जिसके मेडिकल कॉलेज की जमीन और regulatory compliance पर MCI के स्तर तक गंभीर सवाल उठ चुके हों,

जिसके मामलों में सरकारी जांचें हुई हों,

और जिसका प्रमुख वीडियो में सरकार को भ्रष्ट बताता सुनाई दे—

उसी मंच पर उत्तराखंड का भाजपा मंत्री सम्मान लेने क्यों पहुंचा?

Voice of Nation के मुख्यमंत्री धामी और मंत्री सुबोध उनियाल से 7 सवाल

1. ₹87.63 करोड़ की recovery में अब तक कितनी वास्तविक धनराशि सरकार को प्राप्त हुई है?

2. यदि पूरी रकम प्राप्त नहीं हुई तो शेष वसूली कब तक होगी?

3. सुभारती से संबंधित सरकारी/उच्च स्तरीय जांच रिपोर्टों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

4. क्या मंत्री सुबोध उनियाल को कार्यक्रम में जाने से पहले इन विवादों और सरकारी recovery की जानकारी थी?

5. अतुल कृष्ण भटनागर द्वारा सरकार को भ्रष्ट बताए जाने वाले बयान पर मंत्री और भाजपा का क्या रुख है?

6. क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने मंत्री से इस कार्यक्रम और सम्मान को लेकर स्पष्टीकरण मांगेंगे?

7. क्या उत्तराखंड सरकार ₹87.63 करोड़ की वर्तमान recovery status और संबंधित जांचों की Action Taken Report सार्वजनिक करेगी?

सम्मान से पहले हिसाब जरूरी

सार्वजनिक जीवन में किसी कार्यक्रम में जाना अपराध नहीं है और किसी आरोपी के साथ तस्वीर होना अपने आप किसी मंत्री को किसी आरोप से नहीं जोड़ता।

लेकिन जब मामला ₹87.63 करोड़ के सरकारी धन, सरकारी जांचों, वर्षों पुराने मेडिकल कॉलेज विवाद और लंबित न्यायिक मामलों से जुड़ा हो तो एक कैबिनेट मंत्री की सार्वजनिक उपस्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

और इसलिए Voice of Nation का सवाल बहुत सीधा है—

“₹87.63 करोड़ का हिसाब बाकी है साहब—फिर सम्मान लेने की इतनी जल्दी क्यों?”

उत्तराखंड की जनता को तस्वीर नहीं, सरकारी खजाने के ₹87.63 करोड़ का हिसाब और जांचों पर हुई कार्रवाई का जवाब चाहिए।

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Voice of Nation इस समाचार में उठाए गए मुद्दों पर मंत्री सुबोध उनियाल, उत्तराखंड सरकार तथा सुभारती पक्ष का जवाब आमंत्रित करता है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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