सुभारती पर फिर कानूनी शिकंजा! मंत्री के साथ तस्वीर में खड़े संचालकों से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में CJM का बड़ा आदेश
420, 406, 120-B, 504, 506 आदि धाराओं से जुड़े प्रकरण में पुलिस जांच के आदेश—₹87.63 करोड़ की सरकारी वसूली, CAG Audit, जमीन-ट्रस्ट विवाद और CBI केस के बीच सुभारती के मंच पर सम्मान लेते मंत्री सुबोध उनियाल की तस्वीर ने खड़े किए बड़े सवाल
VOICE OF NATION EXCLUSIVE
सुभारती पर फिर कानूनी शिकंजा! मंत्री के साथ तस्वीर में खड़े संचालकों से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में CJM का बड़ा आदेश
420, 406, 120-B, 504, 506 आदि धाराओं से जुड़े प्रकरण में अग्रेतर पुलिस जांच के आदेश—₹87.63 करोड़ की सरकारी वसूली, CAG Audit, जमीन-ट्रस्ट विवाद और CBI केस के बीच सुभारती के मंच पर सम्मान लेते मंत्री सुबोध उनियाल की तस्वीर ने खड़े किए बड़े सवाल
सरकारी रिकॉर्ड में पहले ₹133.13 करोड़ नुकसान का आकलन, ₹97.13 करोड़ confirmed loss और फिर ₹87.63 करोड़ की Recovery; सवाल—सरकारी पैसा कहां है और ऐसे समय मंत्री सुभारती के मंच पर क्यों?
देहरादून | Voice of Nation Special Investigation | 22 अगस्त 2026
उत्तराखंड में सुभारती से जुड़े विवादों में एक बार फिर बड़ा न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है।
एक तरफ उत्तराखंड सरकार के अपने रिकॉर्ड में सुभारती मेडिकल कॉलेज प्रकरण के कारण ₹133.13 करोड़ के नुकसान का प्रारंभिक आकलन, बाद में ₹97.13 करोड़ का confirmed loss और Bank Guarantee समायोजित करने के बाद ₹87.63 करोड़ की सरकारी वसूली का आदेश मौजूद है।
दूसरी तरफ CAG से प्राप्त Audit Record में मेडिकल कॉलेज की अनुमति, भूमि, Trust के नाम परिवर्तन, सरकारी जांच और Essentiality Certificate जारी किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल दर्ज हैं।
इसी बीच उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सुभारती के कार्यक्रम में पहुंचते हैं और सुभारती से जुड़े पदाधिकारियों के बीच मंच पर सम्मान ग्रहण करते दिखाई देते हैं।
और अब 19 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून रवि प्रकाश की अदालत ने सुभारती संचालकों से जुड़े एक अलग पुराने आपराधिक प्रकरण में पुलिस की Final Report को निरस्त कर अग्रेतर अन्वेषण का आदेश दे दिया है। वादी की ओर से केस की दमदार पैरवी और बहस बिक्रम सिंह पुंडीर,क्रिमिनल मामलो के जानकर वरिष्ठ अधिवक्ता बिक्रम सिंह पुंडीर ने की ।

अब सवाल केवल सुभारती से नहीं है।
सवाल उत्तराखंड सरकार और उसकी व्यवस्था से भी है।
CJM का बड़ा आदेश—पुलिस की Final Report निरस्त, अब फिर होगी जांच
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देहरादून की अदालत ने प्रकीर्ण फौजदारी वाद संख्या 2084/2025 में 19 अगस्त 2026 को Protest Petition पर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
यह मामला धारा 420, 406, 120-B, 504, 506 आदि से जुड़े पुराने FIR प्रकरण से संबंधित है।
न्यायालय के सामने Protest Petition में आरोप लगाया गया कि पिछली जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं का समुचित परीक्षण नहीं हुआ।
इनमें—
महत्वपूर्ण गवाहों के बयान धारा 161 CrPC के तहत दर्ज नहीं करना,
14 सितंबर 2011 के समझौतानामा का समुचित विश्लेषण नहीं करना,
Trust Deed में कथित विरोधाभासों की जांच नहीं करना,
भूमि की Registry से संबंधित तथ्यों की अनदेखी,
Bank NOC से जुड़े मुद्दों की विस्तृत जांच नहीं करना,
और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया गया।
सबसे गंभीर आपत्ति यह थी कि न्यायालय द्वारा पहले ही अग्रेतर अन्वेषण का आदेश दिए जाने के बावजूद आरोप के अनुसार अपेक्षित नई जांच करने के बजाय पूर्व में की गई जांच के आधार पर पुनः Final Report प्रस्तुत कर दी गई।
CJM ने कहा—यह Final Report स्वीकार करने योग्य नहीं
19 अगस्त 2026 के आदेश में न्यायालय ने पत्रावली का परीक्षण करने के बाद पाया कि पूर्व में अग्रेतर अन्वेषण का आदेश होने के पश्चात Protest Petition में बताए गए तथ्यों के आधार पर अपेक्षित जांच नहीं की गई।
अदालत ने पुलिस की Final Report को स्वीकार करने योग्य नहीं माना।
इसके बाद न्यायालय ने—
Final Report निरस्त कर दी।
और प्रभारी निरीक्षक, थाना कोतवाली डालानवाला, देहरादून को निर्देश दिया कि वह स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ के माध्यम से मामले में अग्रेतर अन्वेषण कराएं।
जांच पूरी होने के बाद उसके परिणाम से न्यायालय को यथाशीघ्र अवगत कराने का भी आदेश दिया गया।
यह आदेश किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं करता।
लेकिन एक बात बिल्कुल स्पष्ट है—
पुलिस की पुरानी Final Report अब मामले का अंतिम शब्द नहीं है।

अब DGP उत्तराखंड की भी परीक्षा
CJM के आदेश के बाद मामला एक बार फिर उत्तराखंड पुलिस के पास है।
इसलिए Voice of Nation को DGP उत्तराखंड से अपेक्षा है कि इस बार जांच पूरी तरह निष्पक्ष, दस्तावेज-आधारित और किसी भी राजनीतिक अथवा संस्थागत प्रभाव से मुक्त हो।
पुलिस को उन सभी बिंदुओं की जांच करनी चाहिए जिन्हें Protest Petition में उठाया गया और जिनके कारण अदालत ने Final Report स्वीकार नहीं की।
यदि आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच आरोपियों को भी संदेह से मुक्त करेगी।
लेकिन यदि दस्तावेज और साक्ष्य किसी अपराध की ओर संकेत करते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए—
चाहे नाम कितना भी बड़ा और प्रभावशाली क्यों न हो।
लेकिन सुभारती की कहानी इस FIR तक सीमित नहीं
इस नए न्यायिक आदेश को अलग करके नहीं देखा जा सकता।
सुभारती मेडिकल कॉलेज को लेकर उत्तराखंड सरकार के अपने पुराने आदेश बेहद गंभीर आर्थिक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के जुलाई 2019 के आदेश में कहा गया कि JNSC Trust और Shri Dev Suman Subharti Medical College से संबंधित घटनाक्रम के कारण राज्य सरकार को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ।
सरकारी आदेश में 300 विद्यार्थियों को राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित करने पर हुए खर्च सहित ₹133.13 करोड़ का नुकसान assessed किया गया।
भविष्य में विद्यार्थियों से संभावित लगभग ₹36 करोड़ की फीस प्राप्ति को घटाने के बाद—
Public Exchequer का confirmed loss ₹97.13 करोड़ निर्धारित किया गया।
और सरकार ने इस ₹97.13 करोड़ की recovery का आदेश दिया।
₹9.50 करोड़ मिले, ₹87.63 करोड़ फिर भी बाकी
सरकारी आदेश में यह भी दर्ज है कि Medical Council of India के माध्यम से Bank Guarantees encash करके ₹9.50 करोड़ प्राप्त हो चुके थे।
इस रकम को ₹97.13 करोड़ में समायोजित करने के बाद—
₹87.63 करोड़ का Recovery Certificate जारी करने का आदेश हुआ।
और मामला यहीं खत्म नहीं होता।
Director Medical Education के आदेश में District Collector, Dehradun को बाकायदा निर्देश दिया गया था कि ₹87.63 करोड़ सरकारी बकाया की recovery की जाए—
“expeditiously without any delay.”
यानी सरकार के अपने आदेश का आशय स्पष्ट था—
₹87.63 करोड़ वसूलने में देरी नहीं होनी चाहिए।
फिर सवाल—₹87.63 करोड़ कहां हैं?
साल गुजरते गए।
और दिसंबर 2025 में मामला फिर सुर्खियों में आया जब चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से recovery की कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद देहरादून जिला प्रशासन ने ₹87 करोड़ से अधिक की वसूली को लेकर कदम उठाए।

इसलिए उत्तराखंड सरकार को आज जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए—
₹87.63 करोड़ में से आज तक वास्तव में कितने रुपये सरकारी खजाने में जमा हुए?
कितना पैसा अभी बाकी है?
वर्षों तक recovery पूरी क्यों नहीं हुई?
किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई?
और सबसे महत्वपूर्ण—
जिस समूह से सरकार को करोड़ों रुपये वसूलने हैं, उसी समूह के मंच पर सरकार का कैबिनेट मंत्री सम्मान लेने क्यों पहुंच रहा है?
CAG Audit Record ने भी खोली पूरी कहानी

सुभारती प्रकरण में सवाल केवल शिकायतकर्ताओं द्वारा नहीं उठाए गए।
Office of the Principal Accountant General (Audit), Uttarakhand से प्राप्त Audit Record में भी इस पूरे मेडिकल कॉलेज प्रकरण की विस्तृत chronology दर्ज है।
Audit material में 150 MBBS सीटों के लिए Essentiality Certificate, केंद्र सरकार/MCI से जुड़ी अनुमति प्रक्रिया, बाद में 300 विद्यार्थियों का सरकारी मेडिकल कॉलेजों में transfer और सरकारी वित्तीय liability तक का उल्लेख है।
इसमें चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा ₹97.13 करोड़ की देनदारी निर्धारित किए जाने का भी उल्लेख है।
CAG Audit में सबसे बड़ा सवाल—सरकारी समिति ने Certificate देने से मना किया, फिर मिला कैसे?
Audit Record की chronology में एक और बेहद गंभीर तथ्य सामने आता है।
नए मेडिकल कॉलेज के लिए Essentiality Certificate मांगे जाने के बाद चिकित्सा शिक्षा निदेशक द्वारा एक जांच समिति गठित की गई।
Audit material के अनुसार उस समिति ने 10 दिसंबर 2020 की अपनी रिपोर्ट में Essentiality Certificate जारी न किए जाने की संस्तुति की।

लेकिन इसके बाद भी—
15 दिसंबर 2020 और फिर 9 जुलाई 2021 को Essentiality Certificate जारी किए जाने का उल्लेख Audit Record में है।
इसलिए सरकार से सीधा सवाल है—
जिस सरकारी जांच समिति ने Essentiality Certificate नहीं देने की संस्तुति की, उसके कुछ ही दिन बाद Certificate किस आधार पर जारी हुआ?
किस अधिकारी ने अनुमति दी?
जांच समिति की recommendation को क्यों नहीं माना गया?
और क्या इसकी जिम्मेदारी कभी तय हुई?
Trust के बार-बार नाम बदलने का Audit Record में उल्लेख
CAG से प्राप्त सामग्री में Trust के विभिन्न समय पर हुए नाम परिवर्तनों की chronology भी दर्ज है।
Audit material में इस नाम-परिवर्तन के संदर्भ में उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठने का उल्लेख किया गया है।
यही वह बिंदु है जहां regulatory सवाल और गंभीर हो जाता है।
यदि पुराने Trust से जुड़ी liabilities, सरकारी recovery, litigation अथवा regulatory history मौजूद थी तो—
नाम बदलने के बाद इन liabilities का क्या हुआ?
क्या नई regulatory applications में पुरानी पूरी history disclose की गई?
क्या NMC को भूमि, सरकारी जांचों और पुराने Trust की liabilities की संपूर्ण जानकारी दी गई?
इन प्रश्नों पर संबंधित नियामकीय प्राधिकरणों के अंतिम निर्णय का इंतजार है।
भूमि पर भी सरकारी जांच में गंभीर सवाल
CAG Audit material में 2020 की जांच के दौरान भूमि के revenue verification का भी उल्लेख मिलता है।
Audit material के अनुसार संबंधित भूमि के संबंध में revenue officials से जांच कराई गई और उपलब्धता/स्वामित्व को लेकर अलग-अलग तथ्य सामने आए।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए भूमि संबंधी eligibility कोई मामूली technicality नहीं है।
यदि applicant Trust के नाम आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं थी अथवा ownership संरचना regulatory norms के अनुरूप नहीं थी, तो सवाल उठता है—
आखिर बाद की permissions किस factual foundation पर प्राप्त की गईं?
इन आरोपों पर संबंधित Trust/संस्था को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है और अंतिम निष्कर्ष सक्षम regulator/न्यायालय का होगा।
दिल्ली में CAG findings पर राजनीतिक भूचाल—उत्तराखंड में जवाबदेही क्यों नहीं?

देश ने दिल्ली Excise Policy विवाद में देखा कि CAG findings ने राजनीतिक जवाबदेही की बहस को कितना बड़ा मुद्दा बनाया।
यहां तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है—
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी सीधे CAG रिपोर्ट के कारण नहीं हुई थी। उनके खिलाफ CBI/ ED की अलग आपराधिक जांचें Delhi Excise Policy मामले में चल रही थीं।
लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक तुलना का सवाल फिर भी जायज है—
दिल्ली में CAG findings पर संसद से सड़क तक जवाबदेही मांगी जा सकती है तो उत्तराखंड में CAG Audit Record में दर्ज इतने गंभीर सवालों पर Action Taken Report कहां है?
क्या Vigilance ने जांच की?
क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई?
क्या सरकार ने Audit objections का पूर्ण जवाब दिया?
क्या ₹87.63 करोड़ पूरी तरह वसूल हुए?
यदि नहीं—
तो क्यों नहीं?
और इसी बीच मंत्री सुबोध उनियाल सुभारती के मंच पर
इन सभी दस्तावेजों के बीच एक तस्वीर बहुत कुछ पूछ रही है।
उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सुभारती के कार्यक्रम में मंच पर सम्मान ग्रहण करते दिखाई देते हैं।

उनके दोनों ओर सुभारती से जुड़े पदाधिकारी बाए ओर अतुल भटनागर और दांये ओर यशवर्धन रस्तोगी खड़े दिखाई देते हैं।
किसी कार्यक्रम में जाना, सम्मान लेना या किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर खिंचवाना अपने आप में किसी गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण नहीं है।
लेकिन यहां प्रश्न criminal liability का नहीं बल्कि public propriety और सरकारी जवाबदेही का है।
एक तरफ सरकार का अपना आदेश—
₹133.13 करोड़ assessed loss.
फिर—
₹97.13 करोड़ confirmed public-exchequer loss.
फिर—
₹87.63 करोड़ Recovery Certificate.
दूसरी तरफ—
CAG Audit में गंभीर observations.
और अब—
CJM देहरादून द्वारा एक अलग आपराधिक मामले में Final Report निरस्त कर अग्रेतर जांच का आदेश।
जो नेता सुभारती गया उसका पद गया या मंत्रालय गया
त्रिवेंद्र ने जैसे ही गुमराह होकर NOC दी वैसे मुख्यमंत्री पद से ही गए और तीरथ ने परमिशन दी वो भी CM पद से गए ( दोनों विवादित बयानों के कारन और पार्टी की गुटबाज़ी के तहत बदले गए बड़े वनवास के बाद अब तीरथ को उपाध्यक्ष बनाया गया )
फ़ाइल फोटो (हरक सिंह तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री …सब गया ED CBI जाँच लम्बित)
धन सिंह रावत तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री (विभाग गया )मुन्ना सिंह चौहान और सेहदिव पुंडीर पर खनन और जमींनो के गंभीर आरोप मीडिया में क्या अगली बार टिकट मिलेगा ?
(अगला टिकट की दावेदार मेयर श्रीनगर ने थामा भाजपा का हाथ ) सहदेव पुंडीर पर गंभीर आरोप लगे टिकट कटना तय!

(कुछ समय पहले सुभारती गए नरेश बंसल की भाजपा कोष्याध्यक्ष पद से छुट्टी )
इन सबके बीच सरकार का मंत्री उसी संस्था के मंच पर सम्मान ग्रहण करे तो सवाल उठेंगे ही।
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ( अध्यक्ष पद से हटने की चर्चाये मीडिया की सुर्खियों में )
DGP उत्तराखंड से निष्पक्ष जाँच की माँग
क्या ₹87.63 करोड़ की Recovery पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
Voice of Nation यह आरोप नहीं लगा रहा कि मंत्री सुबोध उनियाल की कार्यक्रम में उपस्थिति और सरकारी recovery के बीच कोई मिलीभगत है।
ऐसा कोई निष्कर्ष उपलब्ध दस्तावेजों से स्थापित नहीं होता।
लेकिन एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछना जरूरी है—
क्या मंत्री और उत्तराखंड सरकार यह सार्वजनिक आश्वासन देंगे कि सुभारती से किसी मंत्री की निकटता का ₹87.63 करोड़ की recovery, पुलिस जांच या regulatory proceedings पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?
और यदि सरकार को इसमें कुछ छिपाना नहीं है तो—
₹87.63 करोड़ की आज की Recovery Status सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
अतुल कृष्ण भटनागर के खिलाफ CBI का हत्या-साजिश मुकदमा भी लंबित
सुभारती समूह से जुड़े डॉ. अतुल कृष्ण भटनागर के खिलाफ निर्मल शर्मा हत्याकांड से संबंधित CBI मामला भी न्यायिक प्रक्रिया में है।
न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार CBI investigation के बाद धारा 120-B सहपठित धारा 302 IPC सहित आरोपों में charge-sheet दाखिल की गई थी।

मामला विशेष CBI अदालत में न्यायिक अधीन है।
लेकिन सार्वजनिक जीवन में बैठे मंत्री के लिए राजनीतिक सवाल अलग है—
क्या इतने गंभीर लंबित आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति/समूह के सार्वजनिक कार्यक्रम में सम्मान लेते समय मंत्री को अतिरिक्त सावधानी नहीं बरतनी चाहिए थी?
सरकार को भ्रष्ट बताने वाला वीडियो—फिर उसी मंच पर भाजपा का मंत्री?
Voice of Nation को उपलब्ध एक वीडियो क्लिप में अतुल कृष्ण सरकार की व्यवस्था पर बेहद तीखी टिप्पणी करते सुनाई देते हैं।
वीडियो में वह कहते हैं—
“आज आपके देश में सबसे भ्रष्ट सरकार है…”
इसके बाद वह उत्तराखंड में पास के एक पुल के बार-बार टूटने का उदाहरण देते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं।
पूरे भाषण का संदर्भ अलग से देखा जाना आवश्यक है, लेकिन उपलब्ध क्लिप में सुनाई देने वाला बयान अपने आप में राजनीतिक सवाल पैदा करता है।
जो व्यक्ति देश की सरकार की व्यवस्था पर इतना गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है, उसी संस्था के मंच पर भाजपा सरकार का कैबिनेट मंत्री सम्मान क्यों ग्रहण कर रहा है?
क्या मंत्री उस बयान से सहमत हैं?
यदि नहीं—
क्या उन्होंने इसका विरोध किया?
जिन्होंने सोशल मीडिया पर दूसरों को दोषी घोषित किया, अब जांच का भी इंतजार करें
इन विवादों से जुड़े मामलों में पूर्व में विभिन्न पक्षों द्वारा सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में आरोप-प्रत्यारोप किए जाते रहे हैं।
किसी मुकदमे के एक आदेश, conviction अथवा trial के किसी चरण को उठाकर किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से अपराधी घोषित करना न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
अब यही कसौटी सभी पक्षों पर लागू होनी चाहिए।
CJM का 19 अगस्त 2026 का आदेश भी किसी को दोषी घोषित नहीं करता।
लेकिन यह जरूर स्थापित करता है कि—
पुलिस की Final Report स्वीकार नहीं हुई।
Final Report निरस्त हुई।
अग्रेतर पुलिस जांच का आदेश हुआ।
इसलिए अब फैसला सोशल मीडिया नहीं करेगा।
दस्तावेज बोलेंगे, पुलिस जांच करेगी और अंतिम निर्णय अदालत करेगी।
अब मुख्यमंत्री, DGP और सरकार से Voice of Nation के 10 सवाल
(File Photo: In program at Jail with Then there Chief Secretary Uttrakhand)
1. ₹87.63 करोड़ की Recovery में आज तक कितनी वास्तविक धनराशि सरकारी खजाने में जमा हुई?
2. यदि पूरी रकम नहीं आई तो कितना पैसा अभी बकाया है और उसे कब तक वसूला जाएगा?
3. सरकारी आदेश में ₹133.13 करोड़ assessed loss और ₹97.13 करोड़ confirmed loss के बाद जिम्मेदार लोगों/अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
4. CAG Audit Record में दर्ज observations पर सरकार की Action Taken Report क्या है?
5. 10 दिसंबर 2020 को सरकारी जांच समिति द्वारा Essentiality Certificate न देने की संस्तुति के बावजूद बाद में Certificate किस आधार पर जारी हुआ?
6. Trust के नाम परिवर्तन और पुरानी liabilities/regulatory history की क्या पूरी जानकारी संबंधित medical regulators को दी गई थी?
7. CJM देहरादून के 19.08.2026 के आदेश के बाद DGP क्या निष्पक्ष और प्रभावमुक्त अग्रेतर जांच सुनिश्चित करेंगे?
8. क्या जांच में 14.09.2011 का समझौतानामा, Trust Deed, Registry, Bank NOC और महत्वपूर्ण गवाहों की नए सिरे से जांच होगी?
9. क्या मंत्री सुबोध उनियाल को सुभारती कार्यक्रम में जाने से पहले ₹87.63 करोड़ recovery और अन्य लंबित मामलों की जानकारी थी?
10. क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यह सार्वजनिक आश्वासन देंगे कि किसी मंत्री की सुभारती से सार्वजनिक निकटता का recovery, police investigation अथवा regulatory proceedings पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?
सम्मान अपनी जगह, ₹87.63 करोड़ का हिसाब अपनी जगह
यह कहानी किसी व्यक्ति को मीडिया ट्रायल के जरिए दोषी घोषित करने की नहीं है।
यह कहानी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज करोड़ों रुपये के public-exchequer loss, वर्षों से चली आ रही recovery, CAG Audit observations, सरकारी जांचों और अब एक नए न्यायिक आदेश के बाद उठती जवाबदेही की है।
दिल्ली हो या देहरादून—
CAG के सवालों का जवाब सरकार को देना ही चाहिए।
और न्यायालय जब पुलिस से दोबारा जांच करने को कहे तो जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर जनता और अदालत दोनों भरोसा कर सकें।
इसलिए Voice of Nation का सवाल सीधा है—
“मंत्री जी, सम्मान अपनी जगह—पहले उत्तराखंड की जनता के ₹87.63 करोड़ का हिसाब बताइए।”
और DGP उत्तराखंड से अपेक्षा है—
CJM के आदेश की भावना के अनुरूप जांच हो—न दबाव, न प्रभाव, केवल दस्तावेज और कानून।
केंद्रीय गृह मंत्री ने भी जांच बैठायी :-
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री ने भी उक्त मामले का संज्ञान लिया है और एनएमसी को जांच के आदेश दे दिया है
Voice of Nation मंत्री सुबोध उनियाल, उत्तराखंड सरकार, पुलिस विभाग तथा सुभारती/संबंधित पक्षों का जवाब आमंत्रित करता है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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