उत्तराखण्ड के कथाकार विनोद भगत को मिला ‘मुंशी प्रेमचंद सम्मान
उत्तराखण्ड के कथाकार विनोद भगत को मिला ‘मुंशी प्रेमचंद सम्मान
-साहित्यकार डॉ. पंकज भारद्वाज के आवास पर मुंशी प्रेमचंद स्मृति समिति का गरिमामय आयोजन, -साहित्यकारों ने प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर रखे विचार
बिजनौर। हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर मुंशी प्रेमचंद स्मृति समिति द्वारा साहित्यकार डॉ. पंकज भारद्वाज के आवास पर एक गरिमामय साहित्यिक समारोह एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। समारोह में उत्तराखण्ड के काशीपुर से पधारे वरिष्ठ पत्रकार, कथाकार एवं शब्द दूत के संपादक विनोद भगत को साहित्य, पत्रकारिता एवं जनपक्षधर लेखन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘मुंशी प्रेमचंद सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। समिति की ओर से उन्हें शील्ड एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट किया गया। सम्मान की घोषणा होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंकज विश्नोई द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद मुख्य अतिथि विनोद भगत सहित सभी अतिथियों ने कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया।
समारोह की अध्यक्षता सुरेन्द्र प्रकाश भटनागर ने की, जबकि रितेश भटनागर ने संचालन किया। स्वागत संबोधन में डॉ. पंकज भारद्वाज ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी लेखनी से भारतीय समाज के शोषित, पीड़ित और वंचित वर्ग को स्वर दिया। उनका साहित्य आज भी सामाजिक न्याय, मानवीय संवेदना और नैतिक मूल्यों का सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि विनोद भगत की निर्भीक एवं जनपक्षधर लेखनी भी समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा को अभिव्यक्ति देती है, इसलिए उन्हें ‘मुंशी प्रेमचंद सम्मान-2026’ से सम्मानित किया जाना अत्यंत सार्थक है।
विचार गोष्ठी में मुकेश गुप्ता, केके पाठक, जीएस भटनागर, गोपाल खन्ना, अरुण गर्ग, हरपाल सिंह तथा पूर्व प्रधानाचार्य सुरेश शर्मा, सुनील कोठारी, सुरेश शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान समाज का भी मार्गदर्शक है। उनकी रचनाएँ सामाजिक विषमता, अन्याय, शोषण और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त चित्रण करती हैं। वक्ताओं ने कहा कि आज के तकनीकी युग में भी युवा पीढ़ी को प्रेमचंद के साहित्य से जुड़ना चाहिए, क्योंकि उनकी रचनाएँ समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती हैं।
सम्मान ग्रहण करने के बाद विनोद भगत ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानते हुए साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े उन सभी लोगों का सम्मान बताया, जो सत्य, निष्पक्षता और जनहित के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की विचारधारा आज भी हर लेखक और पत्रकार के लिए प्रकाशस्तंभ है तथा साहित्य का उद्देश्य समाज में संवेदनशीलता और सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण तैयार करना है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में सुरेन्द्र प्रकाश भटनागर ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसके चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।