उत्तराखंड का सबसे बड़ा नर्सिंग एडमिशन घोटाला?
तत्कालीन अपर सचिव अरुणेंद्र सिंह चौहान का एक और घोटाला सामने आया ।
उत्तराखंड का सबसे बड़ा नर्सिंग एडमिशन घोटाला?
समिति ने बताई 400 प्रवेशों में गंभीर अनियमितताएँ, लेकिन फरवरी 2026 से निदेशक चिकित्सा शिक्षा की चुप्पी पर उठे सवाल
तत्कालीन अपर सचिव अरुणेंद्र सिंह चौहान का एक और घोटाला सामने आया ।
देहरादून। उत्तराखंड में नर्सिंग शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला फिर चर्चा में है। आरोप है कि एक नर्सिंग संस्थान द्वारा बिना आवश्यक वैधानिक अनुमतियों और राज्य सरकार की स्वीकृत प्रक्रिया के सैकड़ों विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जांच समिति गठित की गई, जिसने अपनी रिपोर्ट में प्रवेश प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए।
सूत्रों के अनुसार समिति ने पाया कि लगभग 400 छात्रों के प्रवेश नियमों एवं अनुमतियों के अनुरूप नहीं थे और संस्थान द्वारा आवश्यक स्वीकृतियों के बिना प्रवेश प्रक्रिया संचालित की गई। मामले की जांच के बाद रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंप दी गई, किंतु आरोप है कि फरवरी 2026 से अब तक रिपोर्ट पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि जांच समिति ने अनियमितताओं की पुष्टि की थी तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए? इसके अलावा इंडियन नर्सिंग काउंसिल के विजिलेंस विभाग ने भी गंभीर जांच की और संस्थान के ख़िलाफ़ आख्या भी शासन से मांगी और फ़रवरी से आज तक शासन ने फाइल दबा कर रखी हुई है ।

मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि नर्सिंग एवं चिकित्सा शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना वैधानिक अनुमतियों के प्रवेश दिए जाने के आरोप सीधे तौर पर छात्रों, अभिभावकों और स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। पूर्व में भी विभिन्न राज्यों में बिना अनुमति या निर्धारित क्षमता से अधिक प्रवेश लेने वाले नर्सिंग संस्थानों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
जानकारों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट वास्तव में विभाग के पास लंबित है तो राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि:
- जांच समिति की रिपोर्ट पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
- रिपोर्ट किन अधिकारियों के पास लंबित है?
- विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा हेतु क्या कदम उठाए गए?
- यदि अनियमितताएँ पाई गईं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध क्या दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है?
राज्य के शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इतनी गंभीर जांच रिपोर्ट पर महीनों तक कार्रवाई न होना स्वयं प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन सकता है।
अब सबकी निगाहें निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस मामले में पारदर्शिता लाते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हैं या नहीं, तथा यदि अनियमितताएँ सिद्ध हैं तो दोषियों के विरुद्ध कब कार्रवाई होती है।
सूत्रो के अनुसार चिकित्सा शिक्षा निदेशालय सिर्फ उपकरणों की खरीद बिक्री , व्यापारिक गतिविधियों और पुनर्वियोग कर सरकारी धन हड़पने का अड्डा बन कर रह गया है जिसमे शासन के नर्सिंग और चिकित्सा शिक्षा विभाग अनुभाग अधिकारी भी शामिल है । नर्सिंग अनुभाग के माध्यम से विभिन नर्सिंग कॉलेजों के बजट से भुगतान किया गया है और खरीद आदेश निदेशालय से किया गया है जिसके प्रमाण वॉयस ऑफ़ नेशन के पास उपलब्ध है । जिसका खुलासा शीघ्र किया जाएगा ।

File and Commitee Report Obtained Under RTI form DME.
अब और बड़ा खुलासा यह हुआ है की नर्सिंग वाली शासन की पत्रावली में यह तथ्य बनाया जा रहा है कि इस प्रकार की कोई जाँच कमेटी ही नहीं बनी यानी पूरी पत्रावली “ गायब “ करने की रुपरेखा बना दी गई है और अनुभाग के सेक्शन ऑफिसर राजेंद्र तिवारी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जानकारी देने से मना कर दिया जबकि पूरी जांच समिति की रिपोर्ट RTI में पूरी पत्रावली निदेशालय से प्राप्त की गई है जो यहाँ प्रकाशित की जा रही है ।

यानी भ्रष्टाचार करो और कमेटी कमेटी गेम खेलो । क्या विभागीय मंत्री सुबोध उनियाल और मुख्यमन्त्री संज्ञान लेंगे ?