सचिवालय समीक्षा अधिकारी सहित कई अफसरों को अधिवक्ता का कानूनी नोटिस, दून से दिल्ली,तमिलनाडू तक पहुंचे दस्तावेज ।
देहरादून। उत्तराखंड सचिवालय के चिकित्सा शिक्षा अनुभाग से जुड़ा एक मामला फिर चर्चा में आ गया है। अधिवक्ता जगदीश प्रसाद भट्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव, सचिवालय प्रशासन के सचिव, समीक्षा अधिकारी समेत कई अधिकारियों को विस्तृत कानूनी नोटिस जारी करते हुए सरकारी अभिलेखों में कथित जालसाजी, हेराफेरी, फर्जीवाड़े तथा गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है कि मामले से जुड़े दस्तावेज राज्य स्तर से लेकर नई दिल्ली तक विभिन्न सक्षम प्राधिकारियों को भेजे जा चुके हैं।
कानूनी नोटिस के अनुसार अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्व में दिए गए उनके नोटिस एवं शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई और कथित रूप से पुराने प्रकरणों को नए मामलों के साथ जोड़कर उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। नोटिस में समीक्षा अधिकारी, अनुभाग अधिकारी, उप सचिव, संयुक्त सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने तथा संबंधित प्रकरण में आवश्यक विधिक कार्रवाई की मांग की गई है।
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित अनियमितताओं से संबंधित अभिलेख, सरकारी पत्रावलियां, विभागीय नोटशीट, पुलिस जांच रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। अधिवक्ता का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में उचित कार्रवाई नहीं होती है तो वे सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
बताया गया है कि प्रकरण से संबंधित पत्राचार उत्तराखंड शासन के विभिन्न विभागों के साथ-साथ भारत सरकार के संबंधित अधिकारियों तक भी भेजा गया है। नोटिस में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को प्रतिलिपि प्रेषित किए जाने का भी उल्लेख है।
जिन अधिकारियों को कानूनी नोटिस संबोधित किया गया है
1. सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग – विनय शंकर पाण्डेय (IAS)
2. सचिव, सचिवालय प्रशासन, उत्तराखण्ड शासन
जिन अधिकारियों के विरुद्ध कारवाई एवं जिनके विरुद्ध FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
1. श्रीमती प्रभा राना – समीक्षा अधिकारी, चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-05
2. अरुणेन्द्र सिंह चौहान – तत्कालीन अपर सचिव (सेवानिवृत्त),
जिन वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिलिपि/संज्ञान हेतु भेजा गया ;-
1. आर. के. सुधांशु (IAS) – प्रमुख सचिव, वित्त
2. सचिव,कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय नई दिल्ली
3. सचिव विजय कुमार IAS पोर्ट शिपिंग एवं वाटर वेस्ट मंत्रालय को उक्त प्रति सचिन कुरवे, चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी,तमिलनाडु को प्रेषित करे




हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोप सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत खुलासे से हुए है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना शेष है।