पूर्व CM के पूर्व OSD चंदन जीना के घर ED की छापेमारी, अब जांच का दायरा कहां तक? पुराने सहयोगियों पर फिर उठे सवाल

Voice of Nation | 11.09.2026 | 10:20 PM IST

देहरादून में ED की बड़ी कार्रवाई

देहरादून। उत्तराखंड में UKSSSC की VPDO परीक्षा-2016 से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और तत्कालीन सत्ता तंत्र को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

ED Raid

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ED के देहरादून सब-जोनल कार्यालय ने मामले से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इसी कार्रवाई के तहत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में OSD और PA रहे चंदन सिंह जीना के आवास की भी तलाशी ली गई।

रिपोर्ट के अनुसार चंदन सिंह जीना के आवास से करीब 32 लाख रुपये की कथित बेहिसाबी नकदी, लगभग 200.5 ग्राम सोना तथा 12 लग्जरी घड़ियां बरामद होने की बात सामने आई है।

हालांकि इन बरामदगियों और उनसे जुड़े वित्तीय स्रोतों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।

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केवल चंदन जीना तक सीमित रहेगी जांच या बढ़ेगा दायरा?

ED की इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल यह है कि जांच केवल VPDO परीक्षा मामले में सामने आए व्यक्तियों और वित्तीय लेन-देन तक सीमित रहेगी या जांच एजेंसी उस दौर के व्यापक नेटवर्क और संबंधित वित्तीय गतिविधियों की भी पड़ताल करेगी।

चंदन जीना वर्ष 2014 से 2017 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के OSD/PA रहे थे। ऐसे में इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

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यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हरीश रावत के करीबी रहे राजीव जैन पहले ही केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। दिसंबर 2024 में राजीव जैन से जुड़े परिसरों पर ED और आयकर विभाग की छापेमारी की खबरें सामने आई थीं।

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उस समय स्वयं हरीश रावत ने भी सार्वजनिक रूप से राजीव जैन का बचाव करते हुए कहा था कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान राजीव जैन ने राजनीतिक प्रभाव का अनुचित लाभ नहीं उठाया।

हरीश रावत सरकार का दौर पहले भी विवादों में रहा

 

तुम चाहो जितना लूट लो मैं आँखे फेर लूँगा  जी हाँ यह हरीश रावत ने हरक सिंह रावत को कहे जो आजकल उनकी (अपनी ही ) सरकार गिरा कर भाजपा में चले गए और फिर भाजपा से निकाले जाने के बाद फिर से कांग्रेस में दिख रहे है पर सवाल यह हैयकी दूध का जला भी छाछ को फूक कर पीता है तो इनपर क्या दुबारा कांग्रेस भरोसा करेगी ?

हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2016 में उत्तराखंड की राजनीति ने देशभर का ध्यान खींचा था। कांग्रेस विधायकों की बगावत, सरकार के बहुमत पर संकट, राष्ट्रपति शासन, floor test और इसी राजनीतिक संकट के बीच सामने आए कथित sting operation ने पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय विवाद में बदल दिया था।

मार्च 2016 में सामने आए एक sting video में हरीश रावत कथित तौर पर बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए राजनीतिक समझौते की बातचीत करते दिखाई देने का आरोप लगा था। बाद में इस मामले में CBI जांच का मुद्दा भी उठा। हरीश रावत ने आरोपों से इनकार किया और पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश बताया था।

यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा बल्कि Uttarakhand High Court तक पहुंचा।

यह भी पढ़े :- Uttarakhand High Court के 21 अप्रैल 2016 के विस्तृत फैसले में उस कथित sting CD का भी उल्लेख किया गया था। Court ने रिकॉर्ड किया कि जब 26 मार्च की रात केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश पर विचार किया था, उस समय CD की सत्यता की forensic verification पूरी नहीं हुई थी। बाद में CFSL verification का संदर्भ भी अदालत के सामने रखा गया। (Indian Kanoon)

High Court ने उस समय यह भी स्पष्ट किया था कि कथित horse-trading या sting का प्रश्न अपनी जगह हो सकता है, लेकिन विधानसभा में बहुमत साबित करने का संवैधानिक तरीका floor test ही था। Court ने भ्रष्टाचार को गंभीर विषय बताते हुए यह भी साफ किया कि उसका फैसला किसी संभावित गलत काम को संरक्षण देने के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए और यदि कोई wrongdoing हुई है तो कानून के अनुसार कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा। (Indian Kanoon)

CBI जांच रुकवाने के लिए भी High Court पहुंचे थे हरीश रावत

इसके बाद हरीश रावत ने CBI जांच को चुनौती देते हुए Uttarakhand High Court का दरवाजा खटखटाया।

20 मई 2016 को High Court ने तत्काल CBI investigation पर पूर्ण रोक लगाने से इनकार करते हुए हरीश रावत से जांच में सहयोग करने को कहा था। उन्होंने CBI जांच की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की थी और आरोप लगाया था कि केंद्रीय जांच एजेंसी का इस्तेमाल राजनीतिक प्रताड़ना के लिए किया जा रहा है। (The Times of India)

बाद में 31 मई 2016 को High Court ने CBI से कहा कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ coercive action न करे, जबकि जांच जारी रह सकती थी। (The Times of India)

इस प्रकार, हरीश रावत सरकार के अंतिम दौर से जुड़ा कथित sting मामला केवल विपक्ष के आरोपों या मीडिया बहस तक सीमित नहीं था, बल्कि CBI और Uttarakhand High Court दोनों के सामने पहुंचा और कई वर्षों तक कानूनी विवाद का विषय बना रहा।

यह तथ्य आज चंदन जीना के यहां हुई ED कार्रवाई के राजनीतिक महत्व को और बढ़ाता है।

क्या पुराने विवादों और मौजूदा जांच के बीच कोई संबंध है?

वर्ष 2016 का राजनीतिक sting मामला और मौजूदा VPDO/मनी लॉन्ड्रिंग जांच दो अलग-अलग कानूनी विषय हैं

जसबीर रावत को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा

हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़े नामों में जसबीर रावत भी रहे हैं। पुराने सार्वजनिक रिकॉर्ड में जसबीर रावत को तत्कालीन मुख्यमंत्री का OSD बताया गया है। बाद के वर्षों में भी उन्हें हरीश रावत के PRO के रूप में उद्धृत किया जाता रहा है।

ऐसे में चंदन जीना के यहां हुई कार्रवाई के बाद स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि क्या जांच एजेंसी केवल उन लोगों तक पहुंचेगी जिनका VPDO प्रकरण से प्रत्यक्ष संबंध सामने आता है, या किसी वित्तीय कड़ी के मिलने पर तत्कालीन सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच होगी?

फिलहाल जसबीर रावत के खिलाफ इस मौजूदा ED कार्रवाई में किसी छापेमारी अथवा कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए किसी व्यक्ति को जांच के दायरे में मान लेना तथ्यों से आगे जाना होगा।

‘चंदन जीना एक मोहरा या जांच की महत्वपूर्ण कड़ी?’—जवाब जांच से ही मिलेगा

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि चंदन जीना जांच की एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण कड़ी हैं या ED को उनके माध्यम से किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचने की उम्मीद है।

यदि तलाशी में मिले दस्तावेज, नकदी अथवा अन्य संपत्तियों का संबंध कथित परीक्षा घोटाले से स्थापित होता है, तो जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी पुराने राजनीतिक या प्रशासनिक संबंध को अपने आप अपराध का प्रमाण न माना जाए।

ED की जांच का अगला चरण इसलिए महत्वपूर्ण होगा। एजेंसी यदि बरामद संपत्तियों के स्रोत, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों के बीच वित्तीय कड़ियों को सार्वजनिक करती है, तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह कार्रवाई चंदन जीना तक सीमित रहती है या इसकी परतें आगे भी खुलती हैं।

उत्तराखंड की राजनीति में फिर गरमाया पुराना दौर

चंदन जीना के यहां हुई ED की तलाशी ने लगभग एक दशक पुराने राजनीतिक और प्रशासनिक दौर को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ED की जांच VPDO परीक्षा-2016 से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग तक ही केंद्रित रहती है या बरामद दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से कोई नई कड़ी सामने आती है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

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