देश में तूफान, बाढ़ और सूखे का खतरा बढ़ा, पढ़े पूरी खबर

नई दिल्ली,VON NEWS: देश के 75 फीसद से ज्यादा जिलों में बेहद खराब मौसम, जैसे तूफान, बाढ़, सूखे, लू (गर्म हवाओं) और शीत लहर का खतरा मंडराता रहता है। इससे लगभग 64 करोड़ लोगों की जिंदगी पर खतरा मंडराता रहता है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरमेंट एंड वॉटर (CEEW) की नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

इस रिपोर्ट का मकसद भारत में चरम जलवायु से जुड़ी घटनाओं वाले हॉटस्पॉट की पहचान करना है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 63.8 करोड़ लोग उन शहरों में रहते हैं, जहां एक्सट्रीम वेदर यानी बेहद खराब मौसम बनने का खतरा रहता है। वहीं हाल के सालों में देश में एक्सट्रीम वेदर से जुड़ी घटनाओं की संख्या, तीव्रता और अनिश्चितता सभी बढ़ी है, जैसे 1970 से 2005 के बीच में देश में ऐसी 250 चरम जलवायु वाली घटनाएं हुई हैं। लेकिन इसके बाद 15 साल में ही देश में 310 ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

ज्यादा बाढ़

पिछले 50 साल में देश में बाढ़ आठ गुना ज्यादा आ रही है। इससे भू-स्खलन, भारी बारिश, तूफान और बादल फटने की घटनाओं में भी 20 गुना इजाफा हुआ है। रिपोर्ट बताता है कि 1970 से 2004 तक देश में हर साल औसतन तीन भयानक बाढ़ आती थी, जो अब हर साल 11 होती है। 2005 तक हर साल 19 जिलों में बाढ़ आती थी, लेकिन अब 55 जिलों में हर साल बाढ़ आती है। देश में कुल 728 जिले हैं।

पिछले साल का हाल

पिछले साल देश में 16 बार बाढ़ जैसे हालात बने, जिनसे 151 जिले प्रभावित हुए। इससे इन जिलों में रहने वाले 9.7 करोड़ लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई। असम के 6 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। पिछले एक दशक में असम के 6 जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन जिलों के नाम हैं- बारपेटा, दारंग, धेमाजी, गोलपारा, गोलाघाट और शिवसागर।

मानसून पर असर

पिछले 100 साल में देश के तापमान में 0.6 डिग्री की वृद्धि हुई है, जिससे ये प्राकृतिक आपदाएं बढ़ गई हैं। रिपोर्ट कहती है कि इससे भारत दुनिया में बाढ़ की राजधानी (फ्लड कैपिटल) बन सकता है। वहीं देश में मानसून के दिनों की संख्या में गिरावट आ रही है, लेकिन एक दिन में बारिश का औसत बढ़ रहा है। इसका नतीजा है कि बाढ़ में इजाफा होगा।

सूखाग्रस्त इलाके भी बढ़े

बाढ़ के साथ देश में सूखा भी बढ़ रहा है। सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 से तुलना करें तो सूखा 13 गुना बढ़ गया है। देश के 68 फीसदी जिले (79 जिले) सूखे की चपेट में आ गए हैं। जबकि 2005 से पहले केवल 6 जिले औसतन सूखे के असर में रहते थे। पिछले एक दशक में अहमदनगर, औरंगाबाद, अनंतपुर, चित्तूर, बगलकोट, बीजापुर, चिक्काबल्लापुर, गुलबर्गा, और हसन जिले सबसे ज्यादा सूखे की चपेट में आए हैं।

साइक्लोन या चक्रवात

रिपोर्ट में पाया गया कि 2005 के बाद, “24 जिलों में प्रति वर्ष चरम चक्रवात की घटनाएं देखी गईं। इससे 4.25 करोड़ लोग को तूफान, तीव्र चक्रवात की चपेट में आए हैं। पिछले दशक में चक्रवातों ने 258 जिलों पर हमला किया है।

दुनिया का हाल

जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप चरम मौसम की घटनाओं के कारण 1999-2018 में दुनियाभर में 4.95 लाख लोगों की जान गई। 12,000 से अधिक चरम मौसम की घटनाओं के कारण इस अवधि के दौरान 3.54 ट्रिलियन डॉलर (क्रय शक्ति समता या PPPके संदर्भ में) का नुकसान हुआ।

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