आयुर्वेद की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाने में आचार्य बालकृष्ण का बड़ा योगदान दालचीनी पर शोध को अंतरराष्ट्रीय मान्यता, भारतीय ज्ञान परंपरा का विश्व मंच पर सम्मान
नई दिल्ली/उत्तराखंड: वॉयस ऑफ़ नेशन (मनीष वर्मा) भारत की प्राचीन आयुर्वेद परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के साथ विश्व स्तर पर स्थापित करने की दिशा में Acharya Balkrishna और पतंजलि अनुसंधान संस्थान लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। हाल ही में दालचीनी (Cinnamon) के गुणों और उसके सुरक्षित उपयोग पर आधारित शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Food Research International (Elsevier Publication) द्वारा स्वीकार किया जाना भारतीय आयुर्वेद के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
आचार्य बालकृष्ण ने अपने वक्तव्य में बताया कि आयुर्वेदिक ग्रंथों में हजारों वर्षों पूर्व ऋषियों ने दालचीनी के औषधीय गुणों का वर्णन किया था। आयुर्वेद में इसे वात-पित्त शामक, बलवर्धक एवं रूप-सौंदर्य बढ़ाने वाला बताया गया है। अब आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी इन गुणों की पुष्टि कर रहे हैं।
पतंजलि के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अनुसंधान में दालचीनी के जैव सक्रिय तत्वों (Bioavailability), मधुमेह नियंत्रण में उसकी संभावित भूमिका (Hypoglycemic Effect), तथा विभिन्न खाद्य पदार्थों के साथ उसके सुरक्षित उपयोग पर विस्तृत अध्ययन किया गया। शोध में यह भी बताया गया कि उचित मात्रा और सही प्रजाति की दालचीनी का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल एक शोध-पत्र की स्वीकृति नहीं, बल्कि भारतीय आयुर्वेदिक ज्ञान प्रणाली की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है। आज जब पूरी दुनिया प्राकृतिक चिकित्सा, हर्बल उपचार और समग्र स्वास्थ्य की ओर लौट रही है, तब भारत का पारंपरिक ज्ञान विज्ञान के साथ मिलकर नई दिशा दे रहा है।
Voice of Nation से बातचीत में कई आयुर्वेद विशेषज्ञों ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि द्वारा किए जा रहे अनुसंधान भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच एक मजबूत पुल का कार्य कर रहे हैं। इससे न केवल आयुर्वेद की विश्वसनीयता बढ़ रही है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को भी नई पहचान मिल रही है।
आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और वैज्ञानिक प्रमाण आधारित शोधों के माध्यम से भारत एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
जय आयुर्वेद • जय भारत