अरुण जेटली स्टेडियम के निर्माण कार्य में घोटाले का आरोप!
नई दिल्ली,VON NEWS: दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में फिर से भ्रष्टाचार का जिन्न बाहर निकल आया है और यहां बनाए जा रहे लाउंज, रेस्तरां और बार के निर्माण में घोटाले के आरोप लगाए जा रहे हैं। डीडीसीए के सहायक सचिव राजन मनचंदा ने 28 फरवरी को डीडीसीए की शीर्ष परिषद में कहा था कि अरुण जेटली स्टेडियम में लाउंज, रेस्तरां और बार आदि के निर्माण कार्य पर जरूरत से ज्यादा खर्चा दिखाया गया है। इसका खर्चा 6.40 करोड़ रुपये बताया गया है और लगभग दो करोड़ से ज्यादा का चेक पास भी कर दिया गया है।
स्टेडियम में निमार्ण कार्य का जो काम चल रहा है, उसमें भी बिना बैंक गारंटी के इतनी बड़ा भुगतान कर दिया गया। मैंने इसमें घोटाले का आरोप लगाया तो मुझे बैंक स्टेटमेंट तक उपलब्ध नहीं कराया गया। मैंने कहा था कि जिसको इतना पैसा दिया जा रहा है पहले उसकी किसी सरकारी एजेंसी से जांच कराई जाए कि कितना काम अब तक किया गया है और कितना भुगतान हुआ है। इसमें 35 से 40 लाख से ज्यादा का काम नहीं हुआ है और काम करने वाली कंपनी को लगभग दो करोड़ रुपये दे दिए हैं।
हाल ही में करीब 34 लाख रुपये का चेक जारी किया गया लेकिन जिसने चेक पर साइन किए, उसने ही इसकी शिकायत कर दी कि मुझे कागज दिखाए बिना चेक भेजे गए। मैंने लोकपाल दीपक वर्मा को लिखा कि इन पर कार्रवाई की जाए और फिर बैंक मैनेजर को भी लिखा कि यह रकम रोक दी जाए तो हालिया चेक से भुगतान रोक दिया गया है। मुझे लगता है कि इसमें भ्रष्टाचार हो रहा है। अगर मैं ठीक हूं तो मुझे कागज दिखाने में कोई दिक्कत नहीं। इसकी सरकारी एजेंसी से जांच करानी चाहिए और इसका खर्चा मैं खुद देने को तैयार हूं। सबसे बड़ी बात यह है कि जो करार हुआ है वहे हमें नहीं दिखाया गया। मैंने बीसीसीआइ से भी इसकी शिकायत की है।
उनके इस्तीफे के बाद फिर नया करार किया गया। इसमें एक आर्किटेक्ट को काम दिखाया जाता है तब इसके बिल पास होते हैं। अगर डीडीसीए के पदाधिकारियों को लगता है तो रकम दी जाती है।
किसी भी बिल को पास करने के लिए समिति के कोई तीन सदस्य इस पर साइन करते हैं, उसके बाद उन्हें ठीक लगता है तो फिर फाइनेंसियल कमेटी के तीन लोग साइन करते हैं और सचिव को भी इस बारे में अवगत कराया जाता है। इसके बाद ही संबंधित कंपनी को भुगतान किया जाता है। निर्माण कार्य करने वाली कंपनी के हालिया चेक को रोकने के सवाल पर अपूर्व ने कहा कि निदेशक संजय भारद्वाज ने बैंक को एक मेल लिखी थी कि कागज पूरे नहीं होने के कारण रकम जारी नहीं की जाए जबकि कागज उन्होंने ही जांचे थे। हो सकता है कि उस समय वह ठीक से नहीं जांच पाए होंगे।
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