समुद्र का बढ़ता जलस्तर बना बड़ा खतरा: मुंबई-कोलकाता समेत दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से अधिक लोग जोखिम में, UN की चेतावनी

 

नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026 | Voice of Nation News | 8:35 IST

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने समुद्र के लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। UN की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत के मुंबई और कोलकाता तथा बांग्लादेश के ढाका जैसे दक्षिण एशिया के निचले तटीय और डेल्टा क्षेत्रों में रहने वाले 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के घर, आजीविका और जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि समुद्र का बढ़ता स्तर अब भविष्य की आशंका भर नहीं है, बल्कि इसका असर अभी से दिखाई देने लगा है। तटीय क्षेत्रों में जमीन के जलमग्न होने, बाढ़, खारे पानी के प्रवेश और लोगों के विस्थापन का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

मुंबई और कोलकाता के लिए क्यों बड़ी चेतावनी?

UN की रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे निचले डेल्टा क्षेत्रों को विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है। इन क्षेत्रों में 14 मिलियन यानी 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के घर, आजीविका और जीवन के प्रभावित होने का खतरा बताया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में समुद्र के बढ़ते स्तर का सबसे गंभीर मानवीय परिणाम बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हो सकता है।

रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा समुद्र

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्र स्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ा, जबकि 2024 में यह बढ़ोतरी रिकॉर्ड 5.9 मिलीमीटर दर्ज की गई।

इसके पीछे मानव गतिविधियों से पैदा हुआ जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर और बर्फ की चादरों का पिघलना तथा महासागरों का लगातार गर्म होना प्रमुख कारण हैं।

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UN के मुताबिक पृथ्वी पर पैदा हो रही अतिरिक्त गर्मी का करीब 91 प्रतिशत हिस्सा महासागर सोख रहे हैं। गर्म होने पर समुद्री जल फैलता है, जिससे समुद्र का स्तर और बढ़ता है।

दुनिया के 77 करोड़ लोग तटीय खतरे के दायरे में

रिपोर्ट में एक और चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। दुनिया भर में करीब 770 मिलियन यानी 77 करोड़ लोग हाई-टाइड लाइन से पांच मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहते हैं।

समुद्र का स्तर बढ़ने से केवल मकानों के डूबने का खतरा नहीं है। इसके कारण—

  • पीने के पानी के स्रोतों में खारा पानी प्रवेश कर सकता है।
  • कृषि भूमि और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
  • अस्पताल, स्कूल और सीवरेज व्यवस्था बाढ़ की चपेट में आ सकती है।
  • सड़क, परिवहन, बिजली और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।
  • मछली पालन और पर्यटन पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

2100 तक आधे मीटर से ज्यादा बढ़ सकता है समुद्र

UN के अनुसार सबसे आशावादी परिस्थितियों में भी वर्ष 2100 तक समुद्र का स्तर लगभग 0.55 मीटर तक बढ़ सकता है। गंभीर परिस्थितियों में यह बढ़ोतरी एक मीटर से अधिक हो सकती है, जबकि उच्च उत्सर्जन की स्थिति में लगभग दो मीटर तक की वृद्धि की कम संभावना वाला लेकिन बेहद गंभीर जोखिम भी मौजूद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के स्तर में कुछ बढ़ोतरी अब जलवायु प्रणाली में पहले से ही तय हो चुकी है, इसलिए उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ तटीय शहरों को बचाने के लिए तत्काल अनुकूलन योजनाएं जरूरी हैं।

UN ने बताए बचाव के उपाय

संयुक्त राष्ट्र ने प्रभावित और संवेदनशील देशों से Early Warning Systems, समुद्री दीवारों, मैंग्रोव संरक्षण, टीलों की बहाली, बेहतर वैज्ञानिक निगरानी और जरूरत पड़ने पर अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों से योजनाबद्ध तरीके से आबादी को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने जैसे कदम उठाने पर जोर दिया है।

UN का संदेश स्पष्ट है—समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और दुनिया की तैयारी तथा उससे निपटने की क्षमता को उससे भी तेजी से बढ़ाना होगा।

भारत जैसे विशाल समुद्री तट वाले देश के लिए यह चेतावनी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मुंबई और कोलकाता जैसे घनी आबादी वाले महानगरों में भविष्य की शहरी योजना, जल निकासी, तटीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को समुद्र के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखकर तैयार करना आने वाले वर्षों की बड़ी चुनौती होगी।

मुंबई के लिए क्यों गंभीर है खतरा?

मुंबई भारत के सबसे अधिक आबादी वाले तटीय महानगरों में शामिल है। शहर का बड़ा हिस्सा समुद्र के बेहद करीब है और मानसून के दौरान भारी बारिश तथा हाई टाइड का एक साथ आना पहले से ही कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा करता है। समुद्र का औसत स्तर बढ़ने से भविष्य में ऐसी घटनाओं की गंभीरता और आवृत्ति बढ़ने की आशंका है।

विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र-स्तर में वृद्धि का असर केवल समुद्र किनारे रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहता। बंदरगाह, रेलवे, सड़क नेटवर्क, बिजली व्यवस्था, जल निकासी प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण शहरी ढांचे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि मुंबई जैसे महानगरों के लिए दीर्घकालिक coastal planning महत्वपूर्ण होती जा रही है।

कोलकाता और सुंदरबन क्षेत्र भी संवेदनशील

कोलकाता और आसपास का गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र कम ऊंचाई के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। समुद्र का खारा पानी अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचने पर कृषि भूमि, भूजल और स्थानीय आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।

इसके साथ ही पश्चिम बंगाल का सुंदरबन क्षेत्र चक्रवाती तूफानों और समुद्री जलस्तर में बदलाव से पहले ही प्रभावित होता रहा है। भविष्य में समुद्र-स्तर की वृद्धि इन चुनौतियों को और जटिल बना सकती है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है UN की चेतावनी?

भारत की हजारों किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा के आसपास बड़ी आबादी रहती है और देश के कई प्रमुख आर्थिक केंद्र भी तटीय क्षेत्रों में स्थित हैं। ऐसे में जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रह सकती।

शहरी नियोजन, बेहतर drainage system, coastal protection, मैंग्रोव संरक्षण, समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियां और आपदा प्रबंधन की तैयारी आने वाले दशकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

UN की यह चेतावनी इस बात की ओर संकेत करती है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि आबादी, अर्थव्यवस्था, रोजगार और शहरों के भविष्य से जुड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

सात द्वीपों को जोड़कर बना आज का मुंबई

आज गगनचुंबी इमारतों, सड़कों और करोड़ों की आबादी वाला मुंबई कभी एक सतत भूभाग नहीं था। ऐतिहासिक रूप से यह अरब सागर में स्थित सात छोटे द्वीपों—Colaba, Little Colaba, Bombay Island, Mazagaon, Parel, Worli और Mahim—का समूह था। इन द्वीपों के बीच समुद्री पानी, खाड़ियां और दलदली क्षेत्र मौजूद थे। 

इन द्वीपों पर मानव बसावट अंग्रेजों के आने से बहुत पहले मौजूद थी और यहां की Koli fishing community को शुरुआती निवासियों में गिना जाता है। बाद में Portuguese और फिर British शासन आया। 1668 में British Crown ने Bombay को East India Company को lease पर दे दिया। 

समय के साथ बड़े engineering और land reclamation projects शुरू हुए। समुद्र और दलदली हिस्सों से भूमि हासिल करने, causeways बनाने और अलग-अलग द्वीपों को जोड़ने की प्रक्रिया ने मुंबई के भौगोलिक स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया। Mumbai Municipal Corporation से जुड़े अध्ययन के अनुसार land reclamation ने सात द्वीपों को जोड़कर एक Island City बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

समुद्र से निकली जमीन और अब समुद्र से ही बढ़ता खतरा

मुंबई के इतिहास का यही पहलू आज की UN चेतावनी को और महत्वपूर्ण बनाता है। जिस महानगर का बड़ा हिस्सा सदियों के दौरान समुद्र से जमीन reclaim करके विकसित किया गया, उसके लिए बढ़ता समुद्री जलस्तर विशेष चिंता का विषय है।

Reclaimed और low-lying coastal areas में भविष्य के जोखिम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि जमीन कभी समुद्र का हिस्सा थी; स्थानीय elevation, drainage, coastal protection और भू-आकृति भी महत्वपूर्ण हैं। फिर भी समुद्र-स्तर बढ़ने के साथ high tide, storm surge और अत्यधिक वर्षा का मेल तटीय महानगरों के लिए चुनौती को बढ़ा सकता है।

मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश और high tide का संयोग पहले से ही शहरी जल निकासी व्यवस्था पर दबाव डालता है। भविष्य में समुद्र का औसत स्तर और ऊपर जाने पर समुद्र की ओर पानी निकालने की क्षमता, तटीय सुरक्षा और flood-management infrastructure की अहमियत और बढ़ सकती है।

इतिहास से भविष्य तक मुंबई के सामने नई चुनौती

मुंबई का विकास इस बात का असाधारण उदाहरण है कि इंसान engineering के जरिए किसी शहर का भूगोल किस हद तक बदल सकता है। लेकिन climate change अब उसी तटीय भूगोल के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहा है।

UN की चेतावनी इसलिए केवल भविष्य में “शहर डूबने” जैसी सनसनीखेज आशंका के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। इसका वास्तविक अर्थ है कि तटीय बाढ़, infrastructure damage, खारे पानी का प्रवेश, आजीविका पर असर और आबादी के संभावित विस्थापन जैसे जोखिम समय के साथ गंभीर हो सकते हैं।

मुंबई जैसे आर्थिक महानगर के लिए coastal protection, मजबूत drainage network, mangrove conservation, scientific mapping और early-warning systems पर निवेश इसलिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है। शहर का इतिहास समुद्र से जमीन हासिल करने की कहानी रहा है; अब आने वाले दशकों की चुनौती उस जमीन और उस पर रहने वाली विशाल आबादी को बढ़ते समुद्री जलस्तर से सुरक्षित रखने की होगी।

स्रोत: United Nations, “Rising seas, rising stakes: What increasing sea-levels mean to humanity”, 31 August 2026. https://india.un.org/en/321915-rising-seas-rising-stakes-what-increasing-sea-levels-mean-humanity?utm_source=chatgpt.com&afd_azwaf_tok=eyJraWQiOiJBQTFBOUFGMTM1QUU0NDI0RDgyN0I1M0MwOUYyRDA4N0JCRTQxMjRENDE4MDNFMzY5NkYwMUYwQjk2NUU4RTUzIiwiYWxnIjoiUlMyNTYifQ.eyJhdWQiOiJpbmRpYS51bi5vcmciLCJleHAiOjE3ODgzNjE4OTQsImlhdCI6MTc4ODM2MTg4NCwiaXNzIjoidGllcjEtOWQ5Yzc3NmQtOGM5NG4iLCJzdWIiOiIyMmE6ZjcyNjpjNGQ2Ojc2ODowOjMwOjA6ZjAwIiwiZGF0YSI6eyJ0eXBlIjoiaXNzdWVkIiwicmVmIjoiMjAyNjA5MDJUMTUxMTI0Wi1lcjE5ZDljNzc2ZDhjOTRuaEMxQk9Nc2F4ODAwMDAwMDAxODAwMDAwMDAwMGR4ZDIiLCJiIjoibkd0ODBGdFNwZHU0ZFkxLXN5WllRenVHTDFxSXVQWkhlbWJLcG5nb1EtYyIsImgiOiJvNjJfY3F6VnJGX1dmWU55cXRwdGNUdFhENzMyUHlHZnkyemhReXRWMV8wIn19.geLicMrjBhGL8pnuUcpXBMYMkTJp_POhw8rAqW9JLFaIWbUsoO2c-V1P3UTWIvjgf6nSK19B6b7ZKsvc8Xex-yp_-h5p5i1kZJwyeoX9TA18DnUdOJXGxiL1s0OY39n3ONAxqDHiZF5y-3I3hGP1CPWROoNrEayyljW2u4iqh0jhnGRU9PBInWpHKUdLPnkacLmOfnWBGtVk_9n8AvnfGOBywxT6NPoTotTikY5OFn0vk4iMS1qkG3T2O0LDJnrM00uEEg5Ub38YwTi4JkUk0zOC-tLbB3Wp1bu4Hl-xglxHjkIUSkcxeBu7jrORbyCucjNdlb4Wvwbgxx-WcQU50g.WF3obl2IDtqgvMFRqVdYkD5s

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