फ़्रंटियर ज्वैलर्स एश्ले हाल की किट्टी में महिलाओं की बड़ी शिकायत ।
देहरादून : किट्टी के नाम पर देहरादून में बड़े बड़े मामले समय समय पर सुर्खियों में रहते है और अब तो सुनार ख़ुद किट्टी चलाने लगे है और किट्टी के नाम पर क्या खेल चल रहा है आज आपको हम बताते है
महिलाओं से प्राप्त शिकायत में पता चला कि फ्रंटियर ज्वैलर्स पलटन बाज़ार और एश्ले हॉल द्वारा सेकड़ो किट्टियों का संचालन किया जाता है और महिलाओं को दुकान के ऊपर स्तिथ होटल कॉस्मोपॉलिटन में खाना खिलाते समय किट्टी निकाली जाती है परंतु महिलाए लगातार उक्त खाने के स्तर को लेकर शिकायते करती रही है और आज तो हद तब हो गई जब सब महिलाओं के सामने खाना लगते ही एक चूहा आया और रायते की डोंगा में डुबकी लगाकर आगे निकल गया ( में AI जनरेट चित्र देखे )जिससे महिलाओं में हड़कंप मच गया इसके बाद अति तो और हो गई जब वेटर ने कहा दूसरा रायता लाया है पर उसे ख़ुद पता नहीं था वो दूसरा है या वही चूहा निकला हुआ ।

जब इस न्यूज़ चैनल द्वारा रेस्टोरेंट के मालिक मनोज माटा नामक व्यक्ति से की गई तो उन्होंने बताया की चूहा कहीं बाहर से आ गया तो वो क्या कर सकते है और अपनी ऊपर वाली किचन दिखाने से महिलाओं को मना कर दिया और खाने की घटिया स्तर पर कहा कि जैसा हमे कहा जाएगा हम वैसा ही खिलायेंगे
महिलाओं ने बताया की बाज़ार में ठेली से भी घटिया राजमा चावल खिलाये जाते है
बड़ा मामला और जाँच का विषय:
वॉयस ऑफ़ नेशन ने फ़्रेंटियर ज्वैलर्स के रसीद पर प्रिंटेड दोनों नम्बरों पर कॉल करके स्पष्टीकरण या वक्तव्य जानना चाहा तो 6120 नंबर पर दो लोगो ने बात की और बोले मालिक हरीश जी से बात करवाते है पर मालिक तक फ़ोन पहुचा तो काट दिया गया और कई बार दुबारा मिलाने पर उठाया नहीं गया जिससे शक की सुई और बढ़ गई …
अब जब रसीद पर प्रिंटेड दूसरे नंबर4264 पलटन बाज़ार पर मिलाया गया तो उन्होंने कहा कि किट्टी के बारे जो पूछना हो हम भी बता देंगे पर जब उन्होंने पूरा प्रकरण सुना तो उन्होंने भी कोई जवाब देने से मना कर दिया । बरहाल हमने अपना धर्म निभाया और आगे भी निभाना उचित समझा ।
खुलासा :
वॉयस ऑफ़ नेशन ने जब महिलाओं से किट्टि की रसीद का ठीक से अवलोकन किया तो उसपर ना तो पैसे देने वाले का नाम था और ना लेने वाले के कोई हस्ताक्षर नहीं थे और ना ही कोई GST या टैक्स संबंधित जानकारी थी यानी आप स्वयं समझ सकते है
नाम ना लिखने के वादे के अनुसार महिलाओं ने बताया की किट्टी में निकले पैसों के बदले जेवर दिए जाते है और वो उसी दाम पर उनके यहाँ ही वापिस लेने की बात कही जाती है पर जब कहीं और बेचा जाये तो उसकी क्वालिटी और मेकिंग चार्ज में भारी कटौती हो जाती है यानी की क्या और किस प्रकार का मटेरियल महिलाओं को दिया जा रहा है इसकी पुष्टि कैसे हो ?
दूसरा फैक्ट यह है कि रसीद पर अकाउंट नंबर छपा है पर किट्टी के पैसे नकद लिए जाते है यानी नकद के बदले जेवर दे दिए जाते है और उनकी एंट्री खातों में है या नहीं किसको पता ।

बरहाल वॉयस ऑफ़ नेशन की पड़ताल शुरू हो चुकी है और जल्दी ही हमारी SIT टीम आपको पूरी जानकारी से अवगत करवाएगी
आप जुड़े रहिए ….वॉयस ऑफ़ नेशन के साथ