उत्तराखंड में न्यायिक फेरबदल: हाईकोर्ट ने जारी की जजों के तबादलों की नई सूची
नैनीताल, 16 जून 2026। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए न्यायिक अधिकारियों के तबादले एवं नई तैनातियों की एक और सूची जारी कर दी है। जारी अधिसूचना के अनुसार विभिन्न जिलों में कार्यरत जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों तथा सिविल जजों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
अधिसूचना के तहत कई अधिकारियों को फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO Act) में नियुक्त किया गया है, जबकि कुछ न्यायिक अधिकारियों को अन्य जिलों में स्थानांतरित कर प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है।
प्रमुख तबादले
- अब्दुल कय्यूम, न्यायाधीश परिवार न्यायालय टिहरी गढ़वाल को स्थानांतरित कर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, विकासनगर (देहरादून) नियुक्त किया गया।
- कुसुम, अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत टिहरी गढ़वाल को एफटीसी/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, देहरादून की जिम्मेदारी दी गई।
- सुधीर तोमर, अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत नैनीताल को फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, नैनीताल में तैनात किया गया।
- ऋतेश कुमार श्रीवास्तव को काशीपुर में नवगठित फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO) में नियुक्ति मिली।
- See List Below :-



देहरादून एवं अन्य जिलों में बदलाव
देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, पौड़ी, चमोली एवं टिहरी जिलों में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर पर भी व्यापक फेरबदल किया गया है। कई अतिरिक्त सिविल जजों को नई अदालतों में पदस्थ किया गया है ताकि लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जा सके।
कैंप कोर्ट संचालन के निर्देश
हाईकोर्ट ने दूरस्थ क्षेत्रों में न्यायिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से कई अदालतों को कैंप कोर्ट आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं—
- लैंसडाउन न्यायालय को धूमाकोट में प्रत्येक माह दो दिन कैंप कोर्ट।
- कोटद्वार न्यायालय को सतपुली में प्रत्येक माह दो दिन कैंप कोर्ट।
- चमोली न्यायालय को जोशीमठ में प्रत्येक माह पांच दिन कैंप कोर्ट।
- टिहरी न्यायालय को प्रतापनगर में प्रत्येक माह तीन दिन कैंप कोर्ट आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा बल
कानूनी जानकारों के अनुसार यह फेरबदल राज्य में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, POCSO मामलों की सुनवाई में तेजी तथा दूरस्थ क्षेत्रों में न्यायिक पहुंच मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्टों में नई नियुक्तियों से संवेदनशील मामलों के निपटारे में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
Voice of Nation News Desk
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