उत्तराखंड समानता पार्टी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
UGC के 13 जनवरी 2026 के समानता संबंधी दिशानिर्देश वापस लेने की मांग
देहरादून।
उत्तराखंड समानता पार्टी ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए समानता संबंधी दिशानिर्देशों को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
पार्टी के अध्यक्ष डॉ. वी.के. बहुगुणा द्वारा स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि UGC के ये दिशानिर्देश न केवल भ्रामक हैं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन दिशानिर्देशों के कारण समाज में गंभीर अशांति फैलने की आशंका उत्पन्न हो गई है।
⚠️ “सरकारी मसौदे का समुचित बचाव नहीं”
पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि इससे पहले सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत मसौदे का प्रभावी ढंग से बचाव नहीं किया गया, जिसके चलते विरोधी पक्ष के संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया और सरकार का पक्ष कमजोर पड़ा।
🎓 सामान्य वर्ग के छात्रों को लेकर चिंता
डॉ. बहुगुणा ने पत्र में लिखा है कि सरकार को केवल किसी एक वर्ग के बजाय सभी वर्गों के छात्रों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि जातिगत आधार पर बनाए गए ऐसे दिशानिर्देशों से सामान्य वर्ग के छात्रों को उत्पीड़न और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
🇮🇳 “एकजुट भारत की आवश्यकता”
पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत को एक ऐसे समाज की आवश्यकता है जो सनातन संस्कृति, समानता, न्याय और स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों पर आधारित हो, जहां सभी वर्गों के लोगों के साथ समान व्यवहार हो।
⏳ शीघ्र कार्रवाई की अपील
उत्तराखंड समानता पार्टी ने प्रधानमंत्री से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।
पत्र 28 जनवरी 2026 को देहरादून से प्रेषित किया गया।

UGC ACT 2026, यूजीसी कानून क्या है, जाने यूजीसी के नए नियम और बदलाव
13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक नया नियम “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” (समता के संवर्द्धन से संबंधित विनियम, 2026) लागू किया। यह नियम भारत के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर लागू होता है और इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित और अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकना है।
इन विनियमों में जाति-आधारित भेदभाव को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विरुद्ध किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है। इससे OBC को स्पष्ट कानूनी सुरक्षा मिलती है और पिछले मसौदा ढाँचे में मौजूद बड़ी कमी को सुधारा गया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 में लागू किया गया नया कानून/नियमावली भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता (Equity), समावेशन (Inclusion) और भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसे मुख्य रूप से उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र, दिव्यांगता अथवा किसी भी अन्य आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव, उत्पीड़न और असमान अवसरों से जुड़े मामलों में वृद्धि देखी गई। इससे न केवल छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों पर भी प्रश्नचिह्न लगे। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए UGC ने 2026 में यह नया कानून लागू किया।
यूजीसी क्या है? | UGC Kya Hai
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission – UGC) भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को विनियमित, विकसित और सुदृढ़ करने वाली एक प्रमुख वैधानिक संस्था है। भारत में राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने का पहला प्रयास वर्ष 1944 के सार्जेंट रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें एक विश्वविद्यालय अनुदान समिति गठित करने की सिफारिश की गई थी। UGC की स्थापना 1956 में UGC अधिनियम, 1956 के अंतर्गत की गई थी। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- UGC का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, जिसमें एकअध्यक्ष, उपाध्यक्ष और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त दस अन्य सदस्य होते हैं।
इसके प्रमुख कार्यों में विश्वविद्यालयों को अनुदान आवंटित करना, उच्च शिक्षा सुधारों पर सलाह देना और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता व मानकों को बढ़ावा देना शामिल हैं। - UGC का मुख्य उद्देश्य भारत में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता, समानता और मानकीकरण सुनिश्चित करना है। यह आयोग विश्वविद्यालयों को अनुदान (Grants) प्रदान करता है, जिससे शिक्षण, शोध, अवसंरचना और अकादमिक विकास को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही UGC यह तय करता है कि कौन-से संस्थान विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने के योग्य हैं।
- UGC की एक महत्वपूर्ण भूमिका शैक्षणिक मानकों को निर्धारित करने की है। यह पाठ्यक्रम ढाँचा, शिक्षक योग्यता, शोध मानक, परीक्षा प्रणाली और डिग्री मान्यता से संबंधित नियम बनाता है। इसके अंतर्गत NET (National Eligibility Test) जैसी परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं, जो उच्च शिक्षा में अध्यापन और शोध के लिए न्यूनतम योग्यता तय करती हैं।
- हाल के वर्षों में UGC ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020)के अनुरूप कई सुधार लागू किए हैं, जैसे Academic Bank of Credits (ABC), Multiple Entry-Exit System, ऑनलाइन और ओपन लर्निंग को बढ़ावा, तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशन से जुड़े नियम। इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाना है।
- इस प्रकार, UGC भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ है, जो न केवल संस्थानों को वित्तीय सहायता देता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक न्याय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी सुनिश्चित करने का कार्य करता है। इसके प्रभावी कार्यान्वयन से भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनती है।