अब मामूली खर्च में होगा घुटनोंं का इलाज,पढ़े पूरी खबर
लखनऊ,VON NEWS: भागदौड़ भरी जिंदगी ने अगर बीमारियों को न्योता दिया है तो तकनीकी उनसे लडऩे के रास्तेे भी सुझा रही है। इन्हीं में से एक बेहद आम घुटनों के दर्द की समस्या से निजात का नया रास्ता खोजा गया है।
डा. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के सेंटर फार एडवांस स्टडीज एवं श्री माता वैष्णो देवी इंजीनियरिंग संस्थान, जम्मू कश्मीर और एसआरएम यूनिवॢसटी तमिलनाडु के इंटरनेशनल ट्राइबोलॉजी रिसर्च में ऐसा देसी फल्यूड (ल्युब्रिकेंट)ईजाद किया गया है, जो बेहद सस्ता व असरदार है। साथ ही आसानी से पीडि़तों के घुटनों में इंजेक्ट किया जा सकता है। दावा है कि नए शोध से घुटनों के इलाज व ऑपरेशन में आने वाला खर्च बेहद कम होगा।
घुटनों में कुदरती फ्ल्यूड की कमी आने के कारण जोड़ो में दर्द की समस्या आम है। इस कमी को पूरा करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक आॢटफिशियल फ्ल्यूड जोड़ो में इंजेक्ट करते हैं। अभी तक इसकी कीमत तीन हजार से शुरू होकर 12 हजार रुपये तक रहती है। ऐसे में तमाम लोग आॢथक दिक्कत के चलते उपचार नहीं करा पाते और आगे का जीवन उन्हेंं बिस्तर पर गुजारना पड़ता है।
इंटरनेशनल ट्राइबोलॉजी रिसर्च में घुटनों के जोड़ो में प्रयोग होने वाले फ्ल्यूड की कीमत काफी मामूली (महज 77 रुपये) है। बाजार तक आने पर इसकी कीमत मौजूदा फ्ल्यूड की कीमत से काफी कम आंकी जा रही है। जानकार बताते हैं कि घुटनों में प्रयोग होने वाले फ्ल्यूड को अभी तक विदेश से आयात किया जाता है, इस कारण भी इसकी कीमत और अधिक बढ़ जाती हैं। इस खोज के बाद फ्ल्यूड के आयात का झंझट भी खत्म होगा।
शोध से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि आयात किए जा रहे और देश में ईजाद फ्ल्यूड में कई तरह से भिन्नता है। कम कीमत के अलावा देसी फ्ल्यूड के लिए कोल्ड चेन मेनटेन करने की जरूरत नहीं है, जबकि मौजूदा समय में प्रयोग किए जा रहे फ्ल्यूड को तैयार होने से इंजेक्ट करने तक कोल्ड चेन अनिवार्य है।
अभी तक इस्तेमाल किए जा रहे फ्ल्यूड को बनाने में बायोमेेटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कुछ विशेष पौधों का एक्सट्रैक्ट और मृत जीवों की हड्डियां भी मिलाई जाती हैं। देसी फ्ल्यूड को बनाने में जैव पदार्थ का इस्तेमाल किया गया है।