मुख्यमंत्री जी दे दीजिए आदेश सीबीआई जांच के : अंकिता भंडारी कांड: बिना जिला मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में बुलडोज़र कार्रवाई — अब यह भी स्पष्ट हो कि मौके पर कौन-कौन अधिकारी मौजूद थे

क्या सीबीआई जांच के लिए यह साक्ष्य प्रयाप्त आधार नहीं है ?

देहरादून | संपादकीय विश्लेषण

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक अत्यंत गंभीर और अब तक अनुत्तरित प्रश्न लगातार उभर रहा है—

👉 जब जिला मजिस्ट्रेट ने स्वयं कहा कि उन्होंने मौके पर ध्वस्तीकरण का कोई निर्देश नहीं दिया, तो फिर बुलडोज़र किसके आदेश पर और किन अधिकारियों की मौजूदगी में चलाया गया?

घटनास्थल का स्पष्ट विवरण (Very Important)

यह पूरी बुलडोज़र कार्रवाई हुई थी:

📍 वनंत्रा रिज़ॉर्ट,

📍 यमकेश्वर क्षेत्र,

📍 जनपद पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

यही वह स्थान था जिसे:

  • संभावित अपराध स्थल (Crime Scene)
  • साक्ष्य-संरक्षण क्षेत्र (Evidence Zone)
  • न्यायिक जांच के लिए संवेदनशील क्षेत्र

माना जाना चाहिए था।

जिला मजिस्ट्रेट का बयान और उससे उपजा बड़ा सवाल

सार्वजनिक रूप से यह बात सामने आई कि:

  • जिला मजिस्ट्रेट ने मौके पर ध्वस्तीकरण का प्रत्यक्ष निर्देश नहीं दिया
  • DM स्वयं घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे

🔴 तो प्रश्न यह है:

  • बुलडोज़र किसके आदेश पर चलाया गया?
  • क्या यह आदेश मौखिक था?
  • क्या किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में कार्रवाई हुई?
  • यदि DM नहीं थे, तो प्रशासनिक चेन ऑफ कमांड किसने संभाली?

अब यह अनिवार्य है कि निम्न बिंदु सार्वजनिक हों

न्याय और पारदर्शिता की दृष्टि से यह आवश्यक है कि:

1️⃣ मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों की पहचान सार्वजनिक की जाए

  • कौन-कौन प्रशासनिक अधिकारी थे?
  • कौन-कौन पुलिस अधिकारी तैनात थे?
  • किस स्तर के अधिकारी ने बुलडोज़र को अनुमति दी?

2️⃣ मौके की वीडियोग्राफी और आदेश-पत्र सामने लाए जाएं

  • क्या किसी अधिकारी ने लिखित आदेश दिया?
  • क्या कोई पंचनामा/सीज़र मेमो बनाया गया?
  • क्या फॉरेंसिक टीम मौके पर थी या नहीं?

3️⃣ जिम्मेदारी तय हो

यदि DM ने निर्देश नहीं दिए, तो:

  • आदेश देने वाला अधिकारी कौन था?
  • क्या उसने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिया?

👉 यह स्वयं में एक स्वतंत्र जांच का विषय बन जाता है।

CBI जांच की मांग और भी मजबूत क्यों हो जाती है

जब:

  • अपराध स्थल को जल्दबाज़ी में ध्वस्त किया जाए
  • जिला मजिस्ट्रेट मौके पर मौजूद न हों
  • DM स्वयं निर्देश देने से इनकार करें
  • और यह स्पष्ट न हो कि आदेश किसने दिया

तो यह मामला केवल हत्या का नहीं रहता, बल्कि:

  • साक्ष्य नष्ट करने
  • प्रक्रियागत चूक
  • संभावित सत्ता के दुरुपयोग

का भी बन जाता है।

🔴 ऐसे मामलों में न्यायालयों ने बार-बार कहा है कि स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी (CBI) द्वारा जांच ही जनविश्वास बहाल कर सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए स्पष्ट सुझाव

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने त्वरित कार्रवाई कर एक कड़ा संदेश देने का प्रयास किया, लेकिन अब समय आ गया है कि:

  • बुलडोज़र कार्रवाई में मौजूद हर अधिकारी को जांच के दायरे में लाया जाए
  • यह स्पष्ट किया जाए कि DM के बिना किस अधिकार से ध्वस्तीकरण हुआ
  • पूरे घटनाक्रम को CBI जांच के लिए सौंपा जाए

👉 इससे सरकार कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत होगी।

निष्कर्ष

अंकिता भंडारी कांड में अब सवाल केवल “किसने हत्या की” का नहीं है, बल्कि:

❓ किसने, किस अधिकार से, और क्यों अपराध स्थल को नष्ट किया?

जब जिला मजिस्ट्रेट स्वयं कहते हैं कि उन्होंने निर्देश नहीं दिए, तब

“मौके पर मौजूद अधिकारियों को सामने लाना और उनकी भूमिका की जांच करना अपरिहार्य हो जाता है।”

“ न्याय तभी पूर्ण होगा जब सच्चाई के हर स्तर की निष्पक्ष जांच हो—और इसके लिए CBI जांच अब अपरिहार्य प्रतीत होती है।

वॉयस ऑफ़ नेशन | संपादकीय डेस्क (मनीष वर्मा)

(जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए)

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