10 राज्यपाल बदले जाएंगे । जानिए कौन

उत्तराखंड से भी एक नाम राज्यपाल के लिए

देहरादून/दिल्ली 12 जून :वॉन न्यूज़ :

अगले महीने में 10 राज्यपालों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. नगालैंड, गुजरात, यूपी और पश्चिम बंगाल वे राज्य हैं, जिनके राज्यपालों का कार्यकाल तो जुलाई के अंत तक ही समाप्त हो जाएगा. ऐसे में अभी से ही कयास लगने शुरू हो गए हैं कि आखिर इन पदों पर बीजेपी के किस नेता का दावा कितना मजबूत है? माना जा रहा है कि उमा भारती, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन, कलराज मिश्र, करिया मुंडा, भगत सिंह कोश्यारी और बंडारू दत्तात्रेय ,मेनका गांधी ,संजय साईनाथ  तथा उत्तराखंड में  मीसा के तहत जेल में बंद रहे डॉ. आर. के .वर्मा ने भी अपना आवेदन प्रधानमंत्री को भेजा है और ये सभी  गवर्नर बनने की रेस में शामिल हैं ।

10 राज्यपालों का कार्यकाल पूरा होने वाला है, जानिये कौन है राज्यपाल बनने की रेस में सबसे आगे !

बता दें कि भारत का संविधान संघात्मक है. इसमें संघ तथा राज्यों के शासन के संबंध में प्रावधान किए गए हैं. संविधान के भाग 6 में राज्य शासन के लिए प्रावधान है ।

यह प्रावधान जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों के लिए लागू होता है।

पीएम मोदी ने मई 2014 में सत्ता संभालने के कुछ ही महीने बाद पांच राज्यपालों की नियुक्ति की थी ।

बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम नाइक को यूपी, ओपी कोहली को गुजरात, केसरीनाथ त्रिपाठी को पश्चिम बंगाल, बलराम दास टंडन को छत्तीसगढ़. पद्मनाभ आचार्य को नगालैंड का राज्यपाल बनाया था ।

ठीक इसी प्रकार अब  2019 मे मंत्री मण्डल के गठन के बाद राज्यो के राज्यपाल नियुक्ति की संभावना प्रबल हो गयी है । तथा कुुुछ राज्यपाल जिनके कार्यकाल पूर्ण नही हुए वो दूसरे राज्य का राज्यपाल बनने के इछुक है ।

बीजेपी सूत्रों का मानना है कि इन 10 सीटों पर बीजेपी अब नए चेहरे ले कर आ सकती है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि एक-दो पुराने चेहरे को बरकरार रखा जाए. वहीं एक से दो पुराने चेहरे को उनके वर्तमान राज्य से हटा कर दूसरे राज्य की जिम्मेदारी दी जा सकती है । इस साल जुलाई से लेकर दिसंबर महीने तक 10 राज्यों के राज्यपाल सेवानिवृत्त होंगे।

 

इन सीटों को लेकर अभी से ही संघ और पार्टी में मंथन का दौर शुरू हो गया है।

 

ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी के कई नेता जो स्वास्थ्य कारणों से या अन्य वजहों से इस बार चुनाव नहीं लड़े हैं, उनमें से कुछ नेताओं को राज्यपाल बनाया जा सकता है ।

अगले महीने से ही राज्यपाल बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी पीएम मोदी ने मई 2014 में सत्ता संभालने के कुछ ही महीने बाद पांच राज्यपालों की नियुक्ति की थी. बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम नाइक को यूपी, ओपी कोहली को गुजरात, केसरीनाथ त्रिपाठी को पश्चिम बंगाल, बलराम दास टंडन को छत्तीसगढ़. पद्मनाभ आचार्य को नगालैंड का राज्यपाल बनाया था ।

गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली का कार्यकाल 15 जुलाई को समाप्त हो रहा है।

 

संघ कोटे से ओमप्रकाश कोहली गुजरात के राज्यपाल बने थे।

नगालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य भी 19 जुलाई को ही रिटायर हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक का भी 21 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

वहीं, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी का 5 साल का कार्यकाल 23 जुलाई को पूरा हो रहा है।

अगस्त और सितंबर महीने में भी एनडीए सरकार द्वारा नियुक्त चार राज्यपालों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव 30 अगस्त, गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा 31 अगस्त, कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला 1 सितंबर को और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह 4 सितंबर को पदमुक्त हो रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम 5 सितंबर को केरल के राज्यपाल के पद से मुक्त हो रहे हैं.

राम नाइक जब यूपी के राज्यपाल बने थे तब उनकी उम्र 80 साल थी। इस लिहाज से नाइक अब 85 साल के हो गए हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि राम नाइक का इस बार राज्य बदल दिया जाए. ओपी कोहली भी जब गुजरात के राज्यपाल बने थे तब उनकी उम्र 78 साल की थी. इस लिहाज से वह भी अब 83 साल के हो गए हैं. केसरीनाथ त्रिपाठी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने थे तब उनकी उम्र 79 साल की थी इस लिहाज से त्रिपाठी अब 84 साल के हो गए हैं. लेकिन, बंगाल में भी विधानसभा के चुनाव हैं और बीजेपी के लिए वह एक महत्वपूर्ण राज्य है. इस लिहाज से देखें तो केसरीनाथ त्रिपाठी का कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है.

कई मौजूदा राज्यपाल उम्र और गणित में फिट नहीं

जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक बलरामदास टंडन को भी मोदी सरकार ने साल 2014 में छत्तीसगढ़ राज्यपाल बनाया था, लेकिन पिछले साल 14 अगस्त को बलरामदास टंडन का निधन हो गया था. टंडन के निधन के बाद गुजरात की पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल को छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनाया गया था. नागालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य भी अब 87 साल के हो गए हैं और उनका भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है. आचार्य पिछले दिनों विवादों में थे इस लिहाज से उम्र और गणित में वह फिट बैठते नहीं दिख रहे हैं. इसलिए माना जा रहा है कि उनका कार्यकाल न बढ़े।

आंध्रप्रदेश के राज्यपाल ई. एस. एल. नरसिम्हन भी इसी साल दिसंबर में 10 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं ।नरसिम्हन यूपीए सरकार द्वारा नियुक्त अकेले राज्यपाल हैं जो अभी तक अपनी सेवा दे रहे हैं । नरसिम्हन देश में सबसे लंबे समय तक सेवारत राज्यपाल भी बन गए हैं. आंध्र के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ निकटता के कारण वह लंबे समय तक टिके रहे ।

संघ की तरह राज्य की भी शासन पद्धति संसदीय है. राज्यपाल की नियुक्ति पूर्ण राज्यों में होती है तथा केंद्र प्रशासित प्रदेशों में उपराज्यपाल की नियुक्ति होती है. भारत में 7 केंद्र शासित राज्य हैं, जिनमें से 3 केंद्र शासित राज्यों में उप राज्यपाल का पद है. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ,दिल्ली और पुडुचेरी बाकी में चार केंद्र शासित राज्यों में प्रशासक होते हैं वहां पर उप राज्यपाल का पद नहीं होता है वह 4 केंद्र शासित राज्य हैं चंडीगढ़, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, लक्ष्यदीप.

वॉयस ऑफ नेशन के सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड में ब्यूरोकेसी ने भी आने वाले कुछ दिनों में भारी भरकम बदलाव सम्भव है ।

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