देश भर में कोंग्रेसियो की हार का कारण भाजपा की रणनीति का कमाल

टिकट बेचने की नीति फेल हुई और खरीदवाने की सफल !

कांग्रेस की देशभर में हार का कारण भाजपा की रणनीति का कमाल । दिल्ली/ देहरादून (वॉयस ऑफ नेशन विशेष राजनीतिक ब्यूरो )
देशभर में कांग्रेस पार्टी की हार पर मंथन किया जा रहा है कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई गई राहुल गांधी ने कह दिया की वह कॉंग्रेस अध्य्क्ष पद से इस्तीफा देना चाहते हैं और सबसे बड़ी बात जो उन्होंने कहीं कि कोई भी गांधी परिवार का व्यक्ति अब पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनेगा ।

बरहाल कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने उनकी दोनों पेशकश को ठुकरा दिया है और उनसे ही अध्यक्ष पद पर बने रहने को कहा है ।

अगर देखा जाए तो क्या देश भर में हो रहे मंथन के दौर में कांग्रेस पार्टी की देशभर में हुई बुरी हार की सच्चाई क्या है इस पर भी सोचना बहुत आवश्यक है 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के बड़े-बड़े कॉंग्रेस के धुरंधर नेता चुनाव हार गए जिनमें स्वयं राहुल गांधी अमेठी से अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत राजस्थान से ज्योति ज्योतिरादित्य सिंधिया गुणा तथा गुलबर्गा सहित सहित बड़े नेता शामिल है जिनमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा भी शामिल है और तो और डिम्पल यादव ,मिसा भारती ,महबूबा मुफ्ती,पार्थ पंवार ,निखिल गौड़ा ,दुष्यंत चौटाला और पूनम सिन्हा भी है और सपा तो अपने गढ़ कन्नौज,बदायूँ ,फीरोजाबाद भी हार गयी ।

कांग्रेस के इतने बड़े और कद्दावर नेता हार जाने का कारण सभी लोग इस पर मंथन कर रहे हैं और इस मंथन पर किसी का ध्यान इस ओर भी गया है कि कहीं ऐसा तो नहीं यह रणनीति और यह चौसर और भाजपा ने ही बैठाई हो जिससे जमीन से जुड़े कार्यकर्ता व वोटर कॉंग्रेस से छिटक जाए ।

जी हां कुछ राजनीति के बड़े जानकार लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में एक परिपाटी बड़े समय से चलते आई है वह है पैसे लेकर टिकट बेचने का खेल ।

जी हां कांग्रेस पार्टी में कोई भी विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव उसमें अक्सर यह देखा गया है कि पैराशूट प्रत्याशी आता है पैसा देकर टिकट खरीदता है और जनता के बीच में जाकर चुनाव लड़ता है और ऐसे प्रत्याशी को वहां की जनता मार मार कर भगा देती है यानी वही के लोकल कांग्रेस के कार्यकर्ता यानी कि पार्टी ही पार्टी को हरा देती है । और पार्टी भी कुछ नही कर पाती ।

जानकार लोगों का मानना है कि इस बार भाजपा के दिग्गज नेताओ एक बड़ी रणनीति के तहत काम किया और कांग्रेस में कई दिग्गज नेताओं से संपर्क साधा और संपर्क साधने के साथ-साथ अपने कुछ ऐसे लोगों को कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की सलाह दी और टिकट खरीदने को पैसे भी दिए गए कुछ ऐसे कांग्रेस नेताओं की लिस्ट बनाई जो पैसे खाकर टिकट दिलवाते है और ऐसे लोगो को कोंग्रेस मैं भेजा जो कि कांग्रेस को पैसा देकर टिकट खरीद सके और उनके टिकट खरीदने के बाद जब उनको टिकट मिल जाएगा तो निसंदेह जो वहां पर पार्टी के वरिष्ठ लोग पिछले सालों से अथवा महीनों से पार्टी के लिए मेहनत करते आ रहे हैं उनका टिकट कट जाएगा और यदि उनका टिकट कट जाएगा तो निसंदेह वह लोग उस प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे और ना ही डालने देंगे और ऐसा मंसूबा कामयाब भी हुआ यानी मतलब साफ है कि बीजेपी की रणनीति काम आई और कांग्रेस के पैराशूट प्रत्याशियों को कांग्रेस के ही लोगों ने इस प्रकार से हरा दिया जिसका असर दिग्गज नेताओं को भी पड़ा और पूरा बिल जनता ने राहुल गांधी पर भी फाड़ा । घमंड ,अहंकार और गाली देने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष को उसकी औकात दिखा दी ।

पूरे देश भर में देखा जाए और यदि जनता गणना करेगी तो इस प्रकार के कई प्रत्याशी पिछले विधानसभा के और इन लोकसभा के चुनाव में नजर आए हैं जो कि पैराशूट प्रत्याशी के रूप में जाने गए

अब बात करते हैं ।
उत्तराखंड की ।

उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी में बगावत चरम सीमा पर आई हरीश रावत के मुख्यमंत्रीत्व काल में जो हरीश रावत का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया और उसके बाद जो कांग्रेस पार्टी में बगावत हुई वह सारी जनता जानती है हरीश रावत को पूरी देश दुनिया ने टीवी चैनल पर यह कहते सुना कि तुम जितना लूटना चाहो लूट लेना मैं आंख और मुह फेर लूंगा इस बात को देश-दुनिया की जनता ने टीवी चैनलों पर देखा और आज उसी का यह नतीजा है कि हरीश रावत नौवीं बार हार का रिकॉर्ड बनाने बनाते नजर आए हैं और वह लोकसभा का चुनाव भी बड़ी भारी लाखो वोटों के अंतर के साथ हार गए और हारे भी तो अपने ही गढ़ में ।

कांग्रेस पार्टी में बगावत उत्तराखंड में और गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है इंदिरा हर्यदेश ने अपने मंत्री रहते बहुत माल बटोरा और हरीश रावत को कुमाऊं से कुछ खाने नही दिया साथ ही हरीश रावत और उनके चमचों और दल्लाओ ने गढ़वाल को लूटा और इंदिरा ने अंदर खाने हरीश रावत को हराने की रणनीति बनाई थी तो और हरीश रावत ने इंद्रा को और लोकसभा के हाल के चुनाव में हरीश रावत के दूसरे टारगेट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह रहे और उनको भी हराने के लिए टिहरी की टिकट दिलवाई गई जिससे कि वह प्रदेश अध्यक्ष पद से जाएं और यही रणनीति हरिद्वार में भी हरीश रावत में अपनाई वहां उन्होंने भाजपा प्रत्याशी रमेश पोखरियाल से सांठगांठ करके स्वयं के लिए भी सेटिंग की और हरिद्वार में उसके बदले कांग्रेस का डमी कैंडिडेट राहुल गांधी के माध्यम से दिलवा दिया जबकि वरिष्ठ कोंग्रेसी हीरा सिंह बिष्ट की टिकट हरिद्वार से तय हो चुकी थी जिसे हरीश रावत ने कटवा दिया और यहां भी भाजपा की रणनीति कारगर साबित हुई ।

विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि आने वाले कुछ समय में उत्तराखंड में कांग्रेस में बड़ा बदलाव हो सकता है और कांग्रेस में कांग्रेस के वरिष्ठ ईमानदार छवि के नेता हीरा सिंह बिष्ट को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है (जो कि पिछली बार हरीश रावत की वजह से ही बनते बनते रह गए थे ) साथ ही हीरा सिंह बिष्ट से यह प्रबल उम्मीद की जा सकती है कि वह पुराने और वरिष्ठ कांग्रेसियों को वापस पार्टी में लाकर पार्टी की छवि स्पष्ट व स्वच्छ बना सकते हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी किशोर उपाध्याय हरीश रावत दोनों को ही कांग्रेस में आजमा चुकी है और दोनो ही फेल साबित हुए है और पार्टी शमशान में अंतिम सांस गिनती दिख रही है और प्रीतम सिंह को तो कई कांग्रेसी समझ ही नही आते क्योंकि वो सबके चहेते और भले बने रहना चाहते है इसिलए 2 वर्ष से कार्यकारिणी ही नही बना पाए ।

हरीश रावत ,किशोर उपाध्याय और प्रीतम सिंह तीनो के ही नेतृत्व में पार्टी रसातल में पहुंच गई है और कब क्या नया हो जाये कह पाना असंभव है ।

कांग्रेस को यह भी मंथन करना होगा कि पुराने वरिष्ठ व असली कोंग्रेसियो को इग्नोर कर व नए नए युवाओं को लाकर प्रयास करना उसको कितना भारी पड़ा, यह बहुत आवश्यक है ।

इन लोक सभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने 9 पूर्व मुख्यमंत्रियो को मैदान में उतारा जिनमे शीला दीक्षित ,वीरप्पा मोइली ,दिग्विजय सिंह ,भूपिंदर हूडा,शामिल है ।

अब बहुत जल्दी ही राजस्थान व मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन भी देखने को मिल सकता है ।

वॉयस ऑफ नेशन के पास इस बात के भी पुख्ता सबूत है कि हीरा सिंह बिष्ट को भी 20 करोड़ की आफर दी गयी थी और उनके निवास पर अमित शाह से बात करवाने लोग पहुचे थे पर अपनी स्वच्छ छवि के ईमानदार व वरिष्ठ कोंग्रेसी श्री हीरा सिंह बिष्ट ने बात तो करनी दूर आफर लाने वालो को बाहर का रास्ता दिखा दिया ।

अब देखना यह है कि प्रदेश कोंग्रेस में यह बदलाव कितना जल्दी होता है और फिर से आने वाले विधानसभा के चुनाव को देखते हुए हीरा सिंह बिष्ट को किस समय पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर सुशोभित किया जाता है ?

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