डीएम देहरादून सुभारती से तत्काल वसूले 87 करोड़ : निदेशक चिकित्सा

सुभारती की रिकवरी निकली नही देने पर होगी कुर्की

देहरादून : फर्जी मेडिकल कॉलेज चलाने ,छात्रो को रास बिहारी बोस सुभारती फर्जी यूनिवर्सिटी की MBBS की फर्जी डीग्री देने व MBBS के छात्रो के 3 बहुमूल्य वर्ष बर्बाद करने के आरोपी डॉ अतुल भटनागर ,यशवर्धन रस्तोगी ,मुक्ति भटनागर सहित इनके सभी अन्य ट्रस्टियों के खिलाफ राज्य सरकार ने 87.6 करोड़ की रिकवरी निकाल दी है व जिलाधिकारी देहरादून को आदेश दिए है कि तत्काल इसकी वसूली करे पर जिलाधिकारी देहरादून 4 जुलाई 2019 से अब तक यह वसूली करने में असफल रहे है और लगता है कि इस देरी की वजह से सुभारती कही हाई कोर्ट की शरण न ले ले ।
जी हाँ ! आपको बता दे कि राज्य सरकार को एक ओर कई मदो में तनख्वाह देने के लायक नही है और ऊपर से राज्य सरकार के 3 मेडिकल कॉलेजों को सुभारती के 300 छात्रो को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी आ गयी है और 300 MBBS के छात्रो को 6 वर्ष पढ़ाने के लिए राज्य सरकार को लगभग 150 करोड़ रुपयों की आवश्यकता होगी जो राज्य सरकार पर अलग से थोपे गए है जिसका कारण सुभारती का बिना MCI की मान्यता के व बिना एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी की मान्यता के MBBS चलाना है ।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट ) में राज्य सरकार ने हलफनामा देते हुए अपने एडवोकेट जनरल के माध्यम से स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि सुभारती के संचालक अतुल भटनागर,यशवर्धन रस्तोगी,मुक्ति भटनागर आदि ने इस जमीन व सम्पति के असली मालिको श्री मनीष वर्मा आदि से धोखाधड़ी की व उनके साथ किए अनुबंध का अनुपालन नही किया तथा उनके बैंको के कर्ज की अदायगी नहीं की तथा उनको दिये गये करोड़ो रूपये के चेक बाउन्स हो गए और सुभारती के पास पुराने मालिको से भूमि हस्तांतरण की रजिस्ट्री भी नही है अर्थात सिर्फ एग्रीमेंट है और अपने को इस प्रॉपर्टी का मालिक बता रहे है और कोर्ट में विवाद व स्टे के चलते रास बिहारी बोस सुभारती यूनिवर्सिटी सरकार को गुमराह कर फर्जी कागजो के आधार पर पिछली सरकार के अंतिम सत्र में पास करवा ली साथ ही बिना मान्यता के MBBS कोर्स का संचालन किया और झूठे कागजो के आधार पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर कौंसललिंग का आदेश लिया व सरकार से कोउसेललिंग करवा ली गयी जिससे कि सरकार को भी भारी मुसीबतों व जिल्लत का सामना करना पड़ा और अंततोगत्वा सुप्रीम कोर्ट को MBBS के 300 छात्रों को राज्य के 3 सरकारी कॉलेजो में शिफ्ट करना पड़ा ।
अब देखना यह है कि DM देहरादून क्या सुभारती के हाई कोर्ट जाने से पहले क्या 87 करोड की वसूली कर पाएंगे ? वैसे भी लगता है कि माननीय न्यायालय से सुभारती को इतने बड़े जुर्म करने के लिए कोई राहत मिलना असम्भव है क्योंकि सुप्रिम कोर्ट के आदेश से सारी कारवाही हुई है ।

You might also like More from author

Leave a Reply

%d bloggers like this: