उत्तराखंड में रहने वाले पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग (OBC /Backward ) की समस्याओ का ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा

उत्तराखंड में रहने वाले पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग (OBC /Backward ) की समस्याओ की सुनवाई हेतु
उत्तराखंड पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग उत्थान एवं कल्याण परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष श्री मनीष वर्मा (पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमन्त्री व वर्तमान में वरिष्ठ भाजपा नेता ) ने एक ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा है ।

ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड में पिछडे व अति पिछड़े वर्ग में उत्तराखंड निर्माण को 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक यहां पिछड़ा वर्ग की अंतिम सूची नहीं बन पाई है। प्रदेश में आयोग तो बना है, पर उसके पास आपेक्षित अधिकार नहीं हैं।

वर्तमान में देश में 127 पिछड़ी जातियां हैं, लेकिन उत्तराखंड में 3 का ही प्रमाणीकरण हुआ है। बीती सरकार में इस क्षेत्र में पहल नहीं की गई, लेकिन वर्तमान सरकार बातचीत में इसके प्रति संवेदनशील नजर आती है। मामले में पिछड़ा वर्ग कमीशन से पत्राचार किया जा रहा है। टैंटिव लिस्ट में संशोधन कर इसे अंतिम रूप दिए जाने का कार्य प्रगति पर था उसके बाद उसका कोई उत्तर नही मिला ।

श्री वर्मा ने कहा कि ओबीसी के प्रमाण पत्र में भी व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। जिसके निस्तारण के प्रयास तो किए जा रहे हैं पर रिजल्ट अच्छे नही आ रहे है । प्रत्येक छह माह तथा एक वर्ष में इस प्रमाण पत्र को रिवाइज करने का प्रावधान है। ऐसे में नियमों का सरलीकरण न होने से प्रमाणपत्र धारकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि राज्य की कई जातियों को ओबीसी में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था। इनमें से एक बार में 17 और दूसरी बार में करीब 5 जातियों की सूची केन्द्र सरकार को भेजी गई थी। केन्द्र सरकार ने प्रदेश की दो जातियों को केन्द्रीय सूची में शामिल कर लिया है। अब इसके बाद अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने उत्तराखंड की 20 और जातियों को ओबीसी में शामिल करने का प्रस्ताव दोबारा केन्द्र सरकार को भेजा गया है। तीन नए समुदाय को दर्जा मिलने के बाद अब राज्य में ओबीसी जाति-समुदाय की संख्या 89 हो गई है।

उत्तराखंड में रहने वाले अति पिछड़े वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए अति पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद का गठन किया गया था जिसमें पांच सदस्यीय परिषद के गठन को तत्कालीन राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने अपनी स्वीकृति दे दी थी इस परिषद में अध्यक्ष के अलावा एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य बनाये जाने थे इसके जी .ओ . के अनुसार अध्यक्ष का पद राज्य मंत्री स्तर का होगा।

इस परिषद के कार्य क्षेत्र में यह परिषद अति पिछड़े वर्ग के लोगों को चिन्हित करेगी और उनके लिये कल्याणकारी योजनाएं बनाकर सरकार को उनकी संस्तुति देगी

अति पिछड़े वर्ग के लिये उत्तराखंड में अति पिछड़ा वर्ग शैक्षिक उत्थान योजना भी प्रारंभ की जानी थी व शिक्षा के क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत वर्तमान में प्रदान की जा रही स्कॉलरशिप को अति पिछड़ा वर्ग के स्टूडेंट्स के लिए दोगुना किया गया था

इस वर्ग के अभ्यर्थियों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की भांति उच्च प्रतियोगी परिक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग की सुविधा प्रदान की जानी थी व अति पिछड़ा वर्ग के मेडिकल और इंजीनियरिंग में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के समान ही निशुल्क लैपटाप उपलब्ध कराया जाना था ।

श्री वर्मा ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से पिछड़े वर्ग के लोगो की विभिन्न समस्याओ के निदान हेतु सभी को बुलाकर एक बैठक कर समस्याओ के निदान की आशा व्यक्त की है

You might also like More from author

Leave a Reply

%d bloggers like this: