इंद्रदेव की होगी मेहरबानी तो दावानल से महफूज रहेंगे देवभूमि के जंगल

देहरादून। जंगल में आग की 21 घटनाएं। 30.4 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित और 43650 रुपये की क्षति। यह है 71 फीसद वन भूभाग और करीब 46 फीसद फॉरेस्ट कवर (वनावरण) वाले उत्तराखंड में इस वर्ष अग्निकाल (फायर सीजन) शुरू होने के बाद दो माह के वक्फे की तस्वीर।

दावानल के लिहाज से संवेदनशील उत्तराखड में दो माह का यह वक्फा सुकून से गुजरा। इसके पीछे इंद्रदेव की नेमत है। नियमित अंतराल में अब तक मिलती आई वर्षा और बर्फबारी ने कहीं भी जंगल की आग को विकराल रूप धारण नहीं करने दिया।

अब वन महकमे को चिंता है तो मई-जून की। हालांकि, वन विभाग के मुखिया जय राज कहते हैं कि किसी भी स्थिति से निबटने के मद्देनजर विभाग की तैयारी पूरी है। सभी वन प्रभागों को बजट अवमुक्त पहले ही किया जा चुका है।

उत्तराखंड में हर साल ही फायर सीजन (15 फरवरी से मानसून आने तक) बड़े पैमाने पर वन संपदा आग की भेंट चढ़ जाती है। पिछले साल को ही लें तो तब दावानल से 4480.04 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था और क्षति आंकी गई थी 86.05 लाख रुपये। इससे पहले 2016 में भी राज्य में जंगल जबर्दस्त ढंग से धधके थे और तब 4437.75 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था।

इस मर्तबा इंद्रदेव की मेहरबानी से दावानल के लिहाज से स्थिति कुछ सुकून में है। नियमित अंतराल में राज्यभर में हो रही वर्षा और चोटियों पर बर्फबारी का ही नतीजा है कि फायर सीजन में अब तक सिर्फ 21 घटनाएं ही हुई और क्षति भी नाममात्र की है।

मौसम के दृष्टिकोण से देखें तो आने वाले दिनों में भी राज्य में वर्षा-बर्फबारी के आसार हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही कि इस पूरे माह तो जंगलों में नमी बनी रहेगी। अलबत्ता, मई-जून में गर्मी के असर दिखाने के अंदेशे से चिंता की लकीरें जरूर खिंच रही हैं। हालांकि, ये भी उम्मीद जताई जा रही कि मौसम का ऐसा ही रुख बना रहेगा और इस मर्तबा यहां के जंगल आग से महफूज रहेंगे।

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