राफेल की कीमत से लेकर HAL तक कांग्रेस के आरोप का जेटली ने दिया जवाब

लोकसभा में नियम 193 के तहत राफेल विमान सौदे पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कांग्रेस पर तीखा हमला किया और कहा कि इस बारे में जो आरोप कांग्रेस नेता ने सदन में लगाए हैं, वे असत्य हैं। उन्हें उम्मीद थी कि जब कांग्रेस राफेल सौदे पर सदन में चर्चा की मांग कर रही है तो शायद कुछ नयी बात कांग्रेस नेता कहेंगे लेकिन उन्हें निराशा हुई है। सदन में जब चर्चा चल रही थी तब अन्नाद्रमुक, तेदेपा सदस्य आसन के समीप नारेबाजी कर रहे थे। बाद में कांग्रेस सदस्य भी आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस के एक सदस्य ने कागज का विमान भी उड़ाया। लोकसभा में अरुण जेटली के भाषण की 10 बातें
लोकसभा में राफेल को लेकर राहुल का दिखा आक्रामक अंदाज- 10 खास बातें

1- राफेल मामले में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने लोकसभा में कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें स्वभाविक रूप से सचाई नापसंद होती है। उन्हें सिर्फ पैसे का गणित समझ में आता है, देश की सुरक्षा का नहीं। जेपीसी की मांग को खारिज करते हुए जेटली ने कहा कि इसमें संयुक्त संसदीय समिति (JPC) नहीं हो सकती है, यह नीतिगत विषय नहीं है। यह मामला सौदे के सही होने के संबंध में है। सुप्रीम कोर्ट में यह सही साबित हुआ है।
2- जेपीसी में दलगत राजनीति का विषय आता है। बोफोर्स मामले में जेपीसी ने कहा था कि इसमें कोई रिश्वत नहीं दी गई। अब वे ही लोग जेपीसी की मांग कर रहे हैं ताकि एक स्वच्छ सरकार के खिलाफ मामला गढ़ने का मौका मिल सके। राफेल विमान सौदा मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए जेटली ने कहा, ” यह एक ऐसा मामला है जिसमें पहले से लेकर अंतिम शब्द तक.. जो भी बोला गया , पूरी तरह से झूठ है।
अरुण जेटली ने ठुकराई राफेल पर राहुल गांधी की JPC की मांग
3- कई रक्षा सौदों के षड्यंत्रकारियों का यह दुस्साहस है कि वे दूसरों पर सवाल कर रहे हैं। जेटली ने गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वह यूरो फाइटर की याद में राफेल का तीर चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें स्वभाविक रूप से सचाई नापसंद होती है।
4- जेटली ने कहा कि आज ये कोई टेप लेकर आए हैं और इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं क्योंकि वह गलत है। यह पूरी तरह से मनगढ़ंत है। ये बातें गलत और त्रुटिपूर्ण हैं ।
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5- वित्त मंत्री ने कहा कि 2016 में जो सौदा हुआ, उसके आधार पर बेयर एयरक्राफ्ट (विभिन्न युद्धक प्रणालियों से विहीन विमान) का दाम यूपीए की कीमत से नौ प्रतिशत कम था और हथियारों से युक्त विमान की बात करें तब यह यूपीए की तुलना में भी 20 प्रतिशत सस्ता था।

6- जेटली ने कहा कि क्या एक औद्योगिक घराने को लाभ दिया है। कांग्रेस पार्टी को आफसेट के बारे में भी पता नहीं है, यह दुख की बात है। आफसेट का मतलब है कि किसी विदेशी से सौदा करते हैं तो कुछ सामान अपने देश में खरीदना होता है। राफेल में 30 से 50 प्रतिशत सामान भारत में खरीदने की बात है।
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7- कुल आफसेट 29 हजार करोड़ रुपये का और आरोप 1.30 लाख करोड़ रुपये का लगाया जा रहा है। आफसेट तय करने का काम विमान तैयार करने वाली कंपनी का है।
8- एचएएल 2.7 गुणा अधिक समय मांग रही थी। फौज जल्द विमान मांग रही थी। इस संबंध में 2016 में यूपीए से बेहतर शर्तो पर वर्तमान सरकार के स्तर पर समझौता किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि राफेल विमान के संबंध में सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट हो गया, लेकिन कांग्रेस की चुनावी जरूरत संतुष्ट नहीं हुई ।
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9- राफेल की खरीद के दौरान पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। अनुबंधन वार्ता समिति, कीमत वार्ता समिति आदि की 74 बैठकें हुई। सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद यह रक्षा खरीद परिषद में गया और फिर सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडल समिति की मंजूरी ली गई।
10- अरुण जेटली ने कहा कि उनसे पूछा गया कि राफेल विमान अब तक क्यों नहीं आया तो मैं उन्हें बता दूं कि यूपीए का समझौता था कि समझौता होने के 11 साल बाद एयरक्राफ्ट की सप्लाई होगी।

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