अतुल भटनागर ,यशवर्धन पर शिकंजा कसने की तैयारी

सुभारती द्वारा फर्जीवाड़ा प्रकरण में एसआईटी गठित ?

देहरादून : राज्य सरकार ने सुभारती प्रबन्धन के अतुल भटनागर व यशवर्धन रस्तोगी के द्वारा छात्रो के भविष्य से ख़िलवाड़ प्रकरण पर तैयारी कर ली है और सूत्रों की माने तो इसी सप्ताह डॉ अतुल भटनागर ,यशवर्धन रस्तोगी को जेल की हवा खानी पड़ सकती है और आगे की जांच एसआईटी गठित कर की जा सकती है ।

आपको बता दे कि 6 दिसंबर को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सुभारती के फर्जीवाड़े को मध्यनजर
रखते हुए राज्य सरकार के डीजीपी को कोर्ट के चलते बीच मे ही कॉलेज को सील करने के आदेश दिए थे और अगले ही दिन सरकार को टेकओवर करने को कहा था ,परन्तु सुभारती ने अपने फर्जी स्टाफ को खड़ा कर सरकार के व मुख्यमंत्री के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगवाये और आज भी कॉलेज के अंदर ये बोल कर बैठे है कि उनकी रास बिहारी बोस सुभारती यूनिवर्सिटी भी यही चल रही है जबकि यूनिवर्सिटी के विषय मे जांच करने पर पता चला कि वो भी फर्जीवाड़ा कर कार्य कर रही है और UGC ने RTI में बताया कि इस यूनिवर्सिटी का अभी तक UGC ने निरीक्षण नही किया है और इस यूनिवर्सिटी को किसी भी कोर्स की उस कोर्स की संबंधित कौंसिल से बिना अनुमति लिए कोई कोर्स चलाने की अनुमति नही है ।
और तो और यह भी पता चला कि जब इस रास बिहारी बोस सुभारती यूनिवर्सिटी को राज्य की तत्कालीन हरीश रावत सरकार की कैबिनेट ने पारित किया उस दिन कोर्ट का स्टे इस पर लगा था तथा जिस दिन ये निजी विश्विद्यालय हरीश रावत की सरकार की कैबिनेट ने पास की उस दिन भी कोर्ट का स्टे लगा हुआ था तथा उत्तराखंड हाई कोर्ट में इस यूनिवर्सिटी के पारित करने को चुनौती दी गयी है ।
बाद में पता चला कि MBBS के 2016-17 के बैच को भी सुप्रीम कोर्ट की oversite commitee को गुमराह करके लिया गया क्योंकि राज्य सरकार ने 4.11.2016 को एमसीआई,व भारत सरकार को लिखा था की इस कॉलेज के पास 13.5 एकड़ जमीन ही है जबकि मानको के अनुसार 20 एकड़ होनीं चाइए और जमीन विवादित भी है तथा केस लंबित है व जमीन 3 भागो में है जबकि जमीन अधिकतम 2 भागो में हो सकती है । अतः 3 भागो में व 3 अलग अलग गाँव में होने की वजह से अनुमन्य नही है ।

उसके बाद भी सुभारती का फर्जीवाड़ा नही रुका व 2017-18 बैच की अनुमति भी कोर्ट का स्टे छिपा कर व सुप्रीम कोर्ट को निचली अदालतों के केस छुपा कर ले ली ।

सुभारती के प्रबन्धन डॉ अतुल भटनागर ,यशवर्धन रस्तोगी ,सोहन लाल ,राजेश मिश्रा ,मुक्ति भटनागर ,कर्नल जी सी श्रीवास्तव ,अवनी कमल ,अविनाश श्रीवास्तव ,श्री राम गुप्ता ने मिलीभगत कर 300 छात्रो व अभिभावकों से लगभग 100 करोड़ रुपये ठग लिए और उन्हें फर्जी डिग्री थमा दी यही नही वर्ष 2017-18 बैच के छात्रों को डेढ़ वर्ष होने को आये अभी तक उनकी पहले वर्ष की परीक्षा ही नही हों पाइ और अब सब सरकार को कोस रहे है जबकि राज्य सरकार की इसमे कोई गलती नही है ,फर्जीवाड़ा तो सुभारती प्रबन्धन ने किया है और 2 साल बाद छात्रो को MCI के माध्यम से पता चला कि ये सब फर्जीवाड़ा किया गया है और रास बिहारी बोस सुभारती यूनिवर्सिटी MCI से मान्यता प्राप्त नही है और न ही श्री देव सुमन सुभारती मेडिकल कॉलेज ने एच एन बी मेडिकल यूनिवर्सिटी से मान्यता ली है और इन छात्रो के इम्तिहान असम्भव है और छात्रो को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी ।
इस बीच देश की जनता को सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला बड़ा निर्णय देखने को मिला कि किसी मेडिकल कॉलेज को सील करने व टेकओवर करने के आदेश दिए गए।

यह देखने के बाद जनता इस आश्चर्य में है कि इतना बड़ा फर्जीवाड़ा होने के बाद सुभारती प्रबन्धन आराम से बाहर खड़ा होकर मुख्यमंत्री व सरकार व शाशन की मुर्दाबाद करवा रहा है और सरकार के खिलाफ प्रेस वार्ता कर रहा है और सरकार तब भी चुप क्यों बैठी है ?
ज्यादा जांच पता चला कि केंद्र से 250 करोड़ मेडिकल कॉलेज के नाम पर मिलने की संभावना थी जो अब विवादों के चलते धूमिल हो गयी है और मात्र 25 करोड़ 2 नए मेडिकल कॉलेज किच्छा व हरिद्वार के लिए मिले है तो अब सरकार सुभारती प्रबन्धन के खिलाफ एस आई टी गठित कर सकती है पर सवाल यह है कि एस आई टी जैसे कई आयोग अब तक इस प्रदेश में बने है जिन मे वर्षो से जाँच चल रही है या वो बन्द हो गए तो कही ये भी सुभारती प्रबन्धन को बचाने का कोई जरिया तो नही ?

बरहाल जनता तो यही चाहती है कि अपराधीयो कों पहले अंदर किया जाए ताकि वो माल्या व चौकसी की तरह देश छोड़ कर भाग न जाये क्योंकि मामला 100 करोड से ऊपर का है और उन महान विभूतियों रास बिहारी बोस व श्री देव सुमन के नाम को भी बदनाम करने की साजिश है व उनके नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया जिसे उत्तराखंड की जनता कभी माफ नही करेगी ।
सुभारती का रिकॉर्ड का अध्ययन करने पर पता चला कि ये सभी कार्य कंडीशनल करते है जैसे जमीन भवन उसके असली मालिकों से शर्ते पूरी करने के आधर पर कंडिशनल ली ,राज्य सरकार से अनिवार्यता प्रमाणपत्र/ एन ओ सी कंडिशनल ली (subject to clear title & post fact approval subject to law department opinion ली ,सुप्रिम कोर्ट की ओवर साइट कमिटी से कंडिशनल परमिशन और अंत मे 2017-18 की भी सुप्रीम कोर्ट से कंडिशनल परमिशन ली और आज तक कोई कंडीशन पूरी ही नही की ।

अब देखना यह है कि इतना समय निकल गया है क्या एक्शन लेने वाले इन्हें देश से बाहर निकल जाने का समय दे रहे है ? या तत्काल कारवाही कर अपराधियो को जेल भेजा जाएगा ?

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